Amethi Politics

Amethi Politics: गौरीगंज में किसका बजेगा डंका? भाजपा की राह में सपा की चुनौती, ब्राह्मण चेहरे पर टिकी निगाहें

गौरीगंज विधानसभा की सियासत में अभी से नए समीकरण बनने लगे हैं। विधायक राकेश प्रताप सिंह के भाजपा में जाने के बाद राजनीतिक हलचल तेज है।

By : विकास जैन
Amethi Politics: गौरीगंज में किसका बजेगा डंका? भाजपा की राह में सपा की चुनौती, ब्राह्मण चेहरे पर टिकी निगाहें

Amethi Politics: गौरीगंज में किसका बजेगा डंका? भाजपा की राह में सपा की चुनौती, ब्राह्मण चेहरे पर टिकी निगाहें

बृजेश मिश्रा ब्यूरो रिपोर्ट,अमेठी: गौरीगंज विधानसभा की सियासत में अभी से नए समीकरण बनने लगे हैं। विधायक राकेश प्रताप सिंह के भाजपा में जाने के बाद राजनीतिक हलचल तेज है। कहीं भाजपा की पकड़ मजबूत बताई जा रही है, तो कहीं समाजवादी पार्टी की चुनौती और नए चेहरे की तलाश चर्चा में है। कांग्रेस की भूमिका और संभावित गठबंधन भी चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में गौरीगंज की जनता किसके पक्ष में खड़ी होगी?

क्षेत्र के जामो, गौरीगंज, मुसाफिरखाना और शाहगढ़ ब्लॉकों में लोगों से फोन, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के माध्यम से बातचीत के आधार पर तैयार किए गए एक अनौपचारिक राजनीतिक आकलन में कई दिलचस्प संकेत सामने आए हैं। हालांकि, यह वैज्ञानिक चुनावी सर्वेक्षण नहीं है और इसके आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें संभावित राजनीतिक रुझानों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

जामो में मुकाबले की जमीन तैयार!

जामो ब्लॉक में संभावित प्रत्याशियों को लेकर सबसे अधिक चर्चा होने का दावा किया गया है। यहां राकेश प्रताप सिंह के साथ पूर्व विधायक चंद्रप्रकाश मिश्रा 'मटियारी', भूपेंद्र शुक्ला और सिंधुजीत सिंह के नाम भी चर्चा में हैं। ब्राह्मण मतदाताओं के बीच नए चेहरे की संभावना को लेकर बातचीत हो रही है, जबकि सपा के पारंपरिक समर्थक वर्गों का रुख भी अहम माना जा रहा है। अनौपचारिक आकलन में भाजपा को 40 प्रतिशत और सपा को 35 प्रतिशत समर्थन का अनुमान है। कांग्रेस के लिए 10 प्रतिशत और अन्य के लिए 10 प्रतिशत का आंकड़ा दिया गया है। बसपा और भीम आर्मी के लिए पांच प्रतिशत का अलग उल्लेख भी है। इन आंकड़ों में श्रेणियों के संभावित दोहराव के कारण इन्हें प्रमाणित वोट प्रतिशत नहीं माना जा सकता।

गौरीगंज में भाजपा आगे, लेकिन चुनौती से इनकार नहीं

गौरीगंज ब्लॉक के आकलन में भाजपा को 55 प्रतिशत और सपा को 35 प्रतिशत समर्थन मिलने का अनुमान लगाया गया है। कांग्रेस और अन्य के हिस्से में पांच-पांच प्रतिशत बताया गया है। यहां राकेश प्रताप सिंह के व्यक्तिगत प्रभाव के साथ ब्राह्मण समाज के संभावित रुख और व्यापारी वर्ग की नाराजगी को भी महत्वपूर्ण माना गया है।चंद्रप्रकाश मिश्रा 'मटियारी', भूपेंद्र शुक्ला और कांग्रेस के अरुण मिश्रा जैसे नामों को लेकर चर्चा होने की बात कही गई है। हालांकि, किसी संभावित चेहरे को लेकर समर्थन की वास्तविक स्थिति व्यापक सर्वे के बिना स्पष्ट नहीं हो सकती।

मुसाफिरखाना में नए विकल्पों की तलाश

मुसाफिरखाना ब्लॉक में ब्राह्मण समाज के बीच नए और भरोसेमंद चेहरे की तलाश का दावा किया गया है। मुस्लिम बहुल गांवों में सपा की मजबूती और कुछ युवा मतदाताओं के बीच आजाद समाज पार्टी की ओर आकर्षण को भी राजनीतिक समीकरण का हिस्सा बताया गया है। यहां के अनुमानित आंकड़ों में भाजपा को 40 प्रतिशत, सपा को 30 प्रतिशत, कांग्रेस को 15 प्रतिशत, बसपा को पांच प्रतिशत और अन्य को 10 प्रतिशत समर्थन दिया गया है।

शाहगढ़ बन सकता है निर्णायक मोर्चा

शाहगढ़ ब्लॉक में ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका को अहम बताया गया है। चंद्रप्रकाश मिश्रा 'मटियारी', भूपेंद्र शुक्ला, हरविजय त्रिपाठी 'धीरू' और राम लखन शुक्ला के नाम चर्चा में बताए गए हैं। आकलन में भाजपा और सपा दोनों को 30-30 प्रतिशत, कांग्रेस को 15 प्रतिशत, बसपा को पांच प्रतिशत और अन्य को 20 प्रतिशत समर्थन मिलने का अनुमान है। यदि स्थानीय चेहरों और निर्दलीय उम्मीदवारों को पर्याप्त समर्थन मिलता है, तो मुकाबले का गणित प्रभावित हो सकता है। हालांकि, यह अभी केवल संभावित स्थिति है।

व्यापारी वर्ग और ब्राह्मण मतदाता बन सकते हैं चर्चा का केंद्र

आकलन में व्यापारी वर्ग के लगभग 60 प्रतिशत लोगों का पारंपरिक झुकाव भाजपा की ओर बताया गया है, जबकि शेष लोगों के बीच उपेक्षा और प्रतिनिधित्व को लेकर असंतोष होने का दावा किया गया है। इसी तरह, कुछ क्षेत्रों में ब्राह्मण मतदाताओं के बीच बदलाव की चर्चा को भी प्रमुखता दी गई है। लेकिन जाति या पेशे के आधार पर पूरे समुदाय के मतदान व्यवहार का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। उम्मीदवार की छवि, स्थानीय विकास, रोजगार, महंगाई, कानून-व्यवस्था और व्यक्तिगत संबंध भी मतदान को प्रभावित कर सकते हैं।

गठबंधन हुआ तो क्या बदलेगा चुनावी गणित?

अलग-अलग चुनाव लड़ने की स्थिति के अनुमान में भाजपा को 41 प्रतिशत, सपा को 32.5 प्रतिशत और कांग्रेस को 11 प्रतिशत समर्थन बताया गया है। बसपा के लिए चार प्रतिशत और अन्य के लिए 11.5 प्रतिशत का आंकड़ा दिया गया है। सपा-कांग्रेस गठबंधन की संभावित स्थिति में संयुक्त समर्थन 43.5 प्रतिशत और भाजपा का समर्थन 41 प्रतिशत बताया गया है। लेकिन गठबंधन होने पर दोनों दलों के मतों का पूरा हस्तांतरण सुनिश्चित नहीं होता। इसलिए इन आंकड़ों के आधार पर किसी दल की जीत का दावा करना जल्दबाजी होगी।

फिलहाल सवाल बड़ा, जवाब बाकी

गौरीगंज विधानसभा में इस समय सबसे अहम सवाल केवल यह नहीं है कि भाजपा और सपा में कौन आगे रहेगा, बल्कि यह भी है कि संभावित उम्मीदवारों में किसकी स्वीकार्यता सबसे अधिक होगी। कांग्रेस की रणनीति, गठबंधन की स्थिति और स्थानीय मुद्दे भी चुनाव की दिशा तय कर सकते हैं। फिलहाल राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं, लेकिन जनता का अंतिम फैसला अभी दूर है। आने वाले समय में उम्मीदवारों की घोषणा और जमीनी गतिविधियों से तस्वीर और स्पष्ट होगी।