Ayodhya Election 2027

Ayodhya Election 2027: अयोध्या विधानसभा में फिर दिखेगा 2022 का री-मैच या भाजपा खेलेगी नया दांव? जानें आंकड़े

राम मंदिर निर्माण के बाद देश की राजनीति में खास पहचान बनाने वाली अयोध्या विधानसभा में 2027 के चुनाव की बिसात बिछने लगी है।

By : विकास जैन
Ayodhya Election 2027: अयोध्या विधानसभा में फिर दिखेगा 2022 का री-मैच या भाजपा खेलेगी नया दांव? जानें आंकड़े

Ayodhya Election 2027: अयोध्या विधानसभा में फिर दिखेगा 2022 का री-मैच या भाजपा खेलेगी नया दांव? जानें आंकड़े

सुधाकर पांडेय, अयोध्या: राम मंदिर निर्माण के बाद देश की राजनीति में खास पहचान बनाने वाली अयोध्या विधानसभा में 2027 के चुनाव की बिसात बिछने लगी है। समाजवादी पार्टी के पवन पांडेय और भाजपा के बीच संभावित मुकाबले ने सियासी चर्चाओं को तेज कर दिया है। भाजपा में मौजूदा विधायक वेद प्रकाश गुप्ता के साथ दूसरे दावेदारों के नामों की चर्चा है। आधिकारिक ऐलान के बिना टिकट की तस्वीर साफ नहीं है।

अयोध्या में घटा BJP की जीत का अंतर, टिकट पर बढ़ी चर्चा

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के वेद प्रकाश गुप्ता को 1,13,414 वोट मिले थे, जबकि सपा के पवन पांडेय को 93,424 वोट हासिल हुए। भाजपा ने 19,990 वोटों से जीत दर्ज की थी। 2017 में यही अंतर 50,440 वोट था। पांच साल में जीत का अंतर 30,450 वोट घटा। ये आंकड़े मुकाबले में आए बदलाव को दिखाते हैं, हालांकि इन्हें भविष्य के नतीजे का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। वेद प्रकाश गुप्ता की मौजूदा विधायक के रूप में दावेदारी के बीच अन्य नामों की चर्चा पार्टी के सामने चयन की चुनौती रखती है। उम्मीदवार का स्थानीय संपर्क, संगठन में स्वीकार्यता, विकास कार्यों का रिकॉर्ड और कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल अहम मुद्दे हो सकते हैं। टिकट की घोषणा से पहले किसी दावेदार को तय उम्मीदवार मानना अटकलों को तथ्य बना देना होगा।

पवन पांडेय के सामने भी आसान राह नहीं 

सपा के लिए पिछला चुनाव मजबूत आधार जरूर देता है, लेकिन उसे स्थानीय समस्याओं, रोजगार, व्यापार, सड़क, जलनिकासी और नागरिक सुविधाओं पर स्पष्ट जवाब भी देना होगा। भाजपा को मंदिर से जुड़ी राजनीतिक उपलब्धियों के साथ स्थानीय अपेक्षाओं पर अपनी स्थिति रखनी होगी।

अयोध्या का निर्णायक सवाल यही है!

क्या भाजपा अपना चुनावी आधार बरकरार रख पाएगी, और क्या सपा 2022 के प्रदर्शन को आगे बढ़ा सकेगी? जवाब टिकट, स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों के प्रचार और मतदाताओं के फैसले से निकलेगा सिर्फ राजनीतिक दावों से नहीं। हाल-फिलहाल भाजपा के उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा से पहले अयोध्या विधानसभा के लिए तैर रहे आधा दर्जन से अधिक भाजपा प्रत्याशियों के नामों की चर्चा राजनीतिक गलियारों के बीच चर्चा का विषय जरूर है , लेकिन अयोध्या विधानसभा की राजनीतिक तस्वीर तब तक धुंधली बनी हुई है जब तक भाजपा समेत राजनीतिक दल अपने प्रत्याशियों के नामों का पत्ता सार्वजनिक नहीं कर देते। चुनाव में यह भी बहुत मायने रखता है कि जो वोट दल विशेष को नहीं मिल रहे उन वोटों का ध्रुवीकरण कितना अधिक दूसरे दलों में हो रहा है । देखना यह दिलचस्प होगा कि अयोध्या में भाजपा अपने मौजूदा प्रत्याशी पर ही दांव लगाती है या किसी दूसरे चेहरे को मैदान में उतार कर नये समीकरण को साधने की जुगत में है । प्रत्याशियों के फैसले के बाद ही राजनीतिक धुंध छंटने की उम्मीद है।