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Radha Ashtami 2026: राधा रानी को बेहद प्रिय हैं ये 3 खास भोग, आज ही नोट करें शुभ मुहूर्त और पूरी पूजा लिस्ट

राधा अष्टमी 2026 पर राधा रानी को लगाएं उनके 3 सबसे प्रिय भोग। जानिए पूजा का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त, दिन-रात का चौघड़िया और इस व्रत का धार्मिक महत्व।

By : स्वदेश डेस्क
Radha Ashtami 2026: राधा रानी को बेहद प्रिय हैं ये 3 खास भोग, आज ही नोट करें शुभ मुहूर्त और पूरी पूजा लिस्ट

राधा रानी को लगाएं इन चीजों का भोग

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और आनंद की अधिष्ठात्री देवी श्री राधा रानी के प्रकट होने का परम पावन दिन है। वर्ष 2026 में 19 सितंबर को राधा अष्टमी का यह भव्य उत्सव अत्यंत दुर्लभ और शुभ योगों के साथ मनाया जा रहा है। मान्यता है कि बिना राधा जी की कृपा के भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति भी अधूरी रह जाती है। यदि आप भी इस राधा अष्टमी अपनी मनोकामनाएं पूरी करना चाहते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि पाना चाहते हैं, तो देवी राधा को उनकी मनपसंद सात्विक चीजों का भोग अवश्य लगाएं। आइए जानते हैं पूजा का सबसे सटीक मुहूर्त और राधा रानी को प्रसन्न करने वाले दिव्य भोग।

राधा अष्टमी 2026: पूजा का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त

शास्त्रों के अनुसार, श्री राधा रानी का जन्म दोपहर के समय हुआ था, इसलिए मध्याह्न काल में ही उनकी पूजा का विशेष विधान है। शुभ पूजा मुहूर्त: दोपहर 11:50 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक (कुल 49 मिनट की सबसे फलदायी अवधि)

19 सितंबर 2026: दिन का चौघड़िया मुहूर्त

सही मुहूर्त में किया गया पूजन कई गुना अधिक फल प्रदान करता है। दिन के चौघड़िया के अनुसार अपनी पूजा की योजना बनाएं:

शुभ (उत्तम समय): सुबह 07:39 बजे से 09:11 बजे तक

चर (सामान्य समय): दोपहर 12:14 बजे से 01:46 बजे तक

लाभ (उन्नति का समय): दोपहर 01:46 बजे से 03:18 बजे तक

अमृत (सर्वोत्तम समय): दोपहर 03:18 बजे से शाम 04:49 बजे तक

सुबह 06:07 से 07:39 तक काल, सुबह 09:11 से 10:43 तक रोग, सुबह 10:43 से दोपहर 12:14 तक उद्वेग और शाम 04:49 से 06:21 तक काल चौघड़िया रहेगा, जिसमें कोई भी नया शुभ कार्य करने से बचें।

19 सितंबर 2026: रात का चौघड़िया मुहूर्त

रात्रि कालीन सेवा और दर्शन के लिए समय तालिका:

लाभ (शुभ समय): शाम 06:21 बजे से रात 07:50 बजे तक

शुभ (उत्तम समय): रात 09:18 बजे से 10:46 बजे तक

अमृत (सर्वोत्तम समय): रात 10:46 बजे से देर रात 12:15 बजे तक

लाभ (प्रातः कालीन समय): सुबह 04:40 बजे से 06:08 बजे तक (20 सितंबर)

शाम 07:50 से 09:18 तक उद्वेग, देर रात 12:15 से 01:43 तक चर, रात 01:43 से 03:11 तक रोग और रात 03:11 से सुबह 04:40 तक काल चौघड़िया रहेगा।

राधा रानी के 3 पसंदीदा भोग: जिनसे तुरंत प्रसन्न होंगी किशोरी जी

शाही केसरिया मालपुआ: शुद्ध देसी घी में बने और इलायची-केसर की चाशनी में डूबे मालपुए राधा रानी को अति प्रिय हैं। इस दिन मालपुए का भोग लगाने से पारिवारिक जीवन की खटास दूर होती है और रिश्तों में अगाध प्रेम घुलता है।

मेवा युक्त रबड़ी: वृंदावन और बरसाने में राधा जी को दूध से बने व्यंजनों का विशेष भोग चढ़ाया जाता है। गाढ़ी, मलाईदार और सूखे मेवों से सजी रबड़ी का भोग लगाने से व्यक्ति की आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और घर में बरकत आती है।

पंचामृत: ताज़ा गाय का दूध, गाढ़ा दही, शुद्ध देसी घी, प्राकृतिक शहद और मिश्री को मिलाकर पंचामृत तैयार करें। इसमें तुलसी दल डालकर श्री राधा-कृष्ण के चरणों में अर्पित करें। पूजा के बाद इसे ग्रहण करने से शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।

राधा अष्टमी व्रत का अलौकिक महत्व

पद्म पुराण के अनुसार, जो भक्त राधा अष्टमी पर देवी राधा के चरण चिह्नों का ध्यान करते हुए व्रत एवं पूजन करते हैं, उन्हें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषों की प्राप्ति होती है। किशोरी जी की प्रसन्नता से भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा स्वतः ही प्राप्त हो जाती है।