पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसद बगावत कर पार्टी से अलग होने की घोषणा की हैं और लोकसभा में अलग गुट के रूप में मान्यता की मांग कर रहे हैं।
कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस का अंदरूनी संकट लगातार गहराता जा रहा है। पार्टी से नाराज 20 सांसदों के गुट ने साफ कर दिया है कि वे न तो बीजेपी में शामिल होंगे और न ही तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर दावा करेंगे। बागी सांसदों का कहना है कि वे लोकसभा में अलग गुट के रूप में मान्यता पाने के लिए स्पीकर से अनुरोध करेंगे और मुद्दों के आधार पर केंद्र की एनडीए सरकार का समर्थन करेंगे।
शताब्दी रॉय ने बताया किन सांसदों ने किया समर्थन
तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और सांसद शताब्दी रॉय ने कहा कि अलग गुट की मांग को लेकर लोकसभा स्पीकर को भेजे गए पत्र पर कई सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने बताया कि बांग्ला फिल्म जगत से जुड़े सांसदों से बातचीत की जिम्मेदारी उन्हें दी गई थी। शताब्दी रॉय के मुताबिक, बांग्ला फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता और घाटल से लगातार 3 बार सांसद चुने गए दीपक अधिकारी (देव) इस पहल के साथ हैं और उन्होंने पत्र पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं।
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‘भ्रष्टाचार और नेताओं की अनदेखी से बढ़ा असंतोष’
शताब्दी रॉय ने पार्टी छोड़ने के कारणों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार बढ़ गया था और नेताओं की बात नहीं सुनी जा रही थी। उनके अनुसार, संगठन में ऐसा माहौल बन गया था जहां किसी को खुलकर अपनी राय रखने की अनुमति नहीं थी। उन्होंने कहा कि चुनावी हार के बाद 4 मई को हुई बैठक में हार के कारणों पर कोई चर्चा नहीं हुई। पार्टी नेतृत्व की ओर से केवल निर्देश दिए गए, लेकिन आत्ममंथन नहीं किया गया।
शताब्दी रॉय का कहना है कि इसी बैठक के बाद उनकी उम्मीदें टूट गईं और उन्होंने तय कर लिया कि अब वह पार्टी में नहीं रहेंगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह अब भी ममता बनर्जी का सम्मान करती हैं और उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई हैं, लेकिन पार्टी की कार्यशैली से निराश हैं।
कुणाल घोष ने कहा- 'इस्तीफा देकर फिर चुनाव लड़ें'
शताब्दी रॉय के बयान पर तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो नेता ममता बनर्जी के नाम और तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर जीतकर संसद पहुंचे हैं, अगर उन्हें अब पार्टी से शिकायत है तो उन्हें सांसद पद से इस्तीफा देकर दोबारा जनता के बीच जाना चाहिए। कुणाल घोष ने कहा कि चुनाव लड़ने के बाद ही ऐसे नेताओं को अपनी वास्तविक राजनीतिक ताकत का पता चलेगा।