मनोरंजन। इस हफ्ते सिनेमाघरों में सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ और इमरान हाशमी की ‘आवारापन 2’ रिलीज हुई हैं। दोनों फिल्मों की कहानी और ट्रीटमेंट अलग है, लेकिन इमोशन दोनों की अहम कड़ी है। अगर आप वीकेंड पर थिएटर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो जानिए दोनों में कौन सी फिल्म आपके लिए बेहतर हो सकती है।
बंटवारा 1947 की कहानी
राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी ‘बंटवारा 1947’ की कहानी 14 अगस्त 1947 से शुरू होती है। मेरठ में सिकंदर मिर्जा का परिवार आजादी की तैयारी कर रहा होता है। लेकिन दंगों के बढ़ते खतरे को देखते हुए मिर्जा परिवार के साथ लाहौर चला जाता है। लाहौर में उसे एक हवेली मिलती है, जहां एक बुजुर्ग हिंदू महिला पहले से रह रही होती है। परिवार उसे माई कहकर बुलाता है। इसके बाद एक मुस्लिम परिवार और उस महिला के बीच बनने वाला रिश्ता फिल्म की कहानी का केंद्र बन जाता है।
इमोशन के साथ एक्शन
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसके भावनात्मक दृश्य हैं। कुछ सीन दिल छूने वाले हैं, हालांकि कई जगह फिल्म की रफ्तार धीमी लगती है। सनी देओल के फैंस के लिए एक्शन भी है, खासकर दूसरे हाफ में। लेकिन ‘गदर’ जैसी धुआंधार मारधाड़ की उम्मीद लेकर जाना सही नहीं होगा।
एक्टिंग कैसी है?
सनी देओल अपने परिचित अंदाज में प्रभावी हैं। प्रीति जिंटा की वापसी अच्छी लगती है, जबकि शबाना आजमी ने माई के किरदार में शानदार अभिनय किया है। अली फजल भी अपने शायर के किरदार में जंचते हैं। वहीं करण देओल की डायलॉग डिलीवरी और स्क्रीन प्रेजेंस कुछ जगह कमजोर लगती है। अभिमन्यु सिंह ने निगेटिव रोल में अच्छा प्रभाव छोड़ा है।
आवारापन 2 की कहानी
‘आवारापन 2’ 2007 की लोकप्रिय फिल्म का सीक्वल है। इमरान हाशमी एक बार फिर शिवम के किरदार में दिखाई देते हैं। इस बार उनकी जिंदगी में आलिया की एंट्री होती है और कहानी दोनों के रिश्ते के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है।
पहली ‘आवारापन’ देखना जरूरी?
सीक्वल देखने से पहले पहला पार्ट देखना बेहतर रहेगा। इससे शिवम के किरदार और उसके पुराने दर्द को समझने में आसानी होगी। इमरान हाशमी ने अपने इंटेंस अंदाज से शिवम के किरदार को संभाला है। दिशा पाटनी भी अपनी भूमिका में ठीक लगती हैं। हालांकि पूरन गब्बी कई दृश्यों में सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। शबाना आजमी भी फिल्म को मजबूती देती हैं।
कहां कमजोर हैं दोनों फिल्में?
‘बंटवारा 1947’ की कमजोरी इसकी धीमी रफ्तार और कुछ जगह कमजोर अभिनय है। वहीं ‘आवारापन 2’ की कहानी में नयापन कम है और क्लाइमेक्स भी ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ता। हालांकि संगीत और बैकग्राउंड स्कोर पुरानी ‘आवारापन’ की यादें जरूर ताजा करते हैं।
थिएटर में किसे देखने जाएं?
अगर आपको इतिहास, रिश्ते और भावनात्मक कहानी पसंद है तो ‘बंटवारा 1947’ बेहतर विकल्प है। वहीं, इमरान हाशमी के फैन हैं और पहली ‘आवारापन’ पसंद आई थी, तो ‘आवारापन 2’ देख सकते हैं। दोनों फिल्मों को 5 में से 3 स्टार दिए जा सकते हैं।