नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दिल्ली में एक निजी टीवी चैनल के कार्यक्रम में विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक तरफ दुनिया नई व्यवस्था की तलाश में है, वहीं देश में कुछ लोग अव्यवस्था का सपना देख रहे हैं। निशाना विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर था। मोदी ने कांग्रेस को परजीवी की तरह बताया और सवाल उठाया कि पार्टी कब तक एक फेल प्रोडक्ट को लॉन्च करने की कोशिश करती रहेगी।
कांग्रेस पर क्या बोले पीएम मोदी
कार्यक्रम में पीएम ने कहा कि कांग्रेस परजीवी की तरह है, जो दूसरों को आगे नहीं बढ़ने देती। उनका कहना था कि सत्ता जाने के बाद कांग्रेस को सब कुछ इतना बुरा लगने लगा है कि अब वह पूरी व्यवस्था को ही नष्ट करने पर उतारू है।
बदलती वैश्विक व्यवस्था और यूएन पर सवाल
मोदी ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था बदल रही है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएं इसके साथ कदम मिलाने में संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध से दुनिया ने सम्मान, सहयोग और विवादों के समाधान का सबक लिया था और इसी से यूएन की नींव पड़ी। यूएन ने अपनी भूमिका निभाई, पर आज की चुनौतियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। जब समस्याएं बदल जाएं और समाधान का तरीका न बदले, तो व्यवस्था में दूरियां दिखने लगती हैं। पीएम के मुताबिक आज व्यापार, तकनीक और समुद्री मार्गों को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रेड वेपनाइजेशन का माध्यम बन रहा है और सी रूट जियोपॉलिटिकल टेंशन का केंद्र बन गए हैं। उन्होंने कहा कि चुनौती यह है कि इन नई वास्तविकताओं को जगह कैसे मिले।
चाणक्य के मत्स्य न्याय का जिक्र
पीएम ने प्राचीन भारतीय अर्थशास्त्री चाणक्य का जिक्र किया और संस्कृत सूत्र अप्रणीतः तु मत्स्यन्यायमुद्भावयति का उल्लेख किया। उन्होंने समझाया कि जब दंड देने की व्यवस्था या कानून लागू नहीं होता, तब मत्स्य न्याय पैदा होता है, यानी बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है। उनके मुताबिक दुनिया को आज ऐसी स्थिति नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था चाहिए जो इस मत्स्य न्याय को रोके। मोदी ने कहा कि भारत दुनिया के सामने यही भूमिका मजबूती से पेश कर रहा है। कोविड महामारी का उदाहरण देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने 100 से ज्यादा देशों को दवाइयां और जरूरतमंद देशों को मुफ्त वैक्सीन पहुंचाई थी।
ग्लोबल साउथ और विकसित भारत 2047
पीएम ने कहा कि बदलती दुनिया में ग्लोबल साउथ की आवाज को मुख्यधारा का हिस्सा बनाना बेहद जरूरी है। विकसित भारत 2047 के विचार पर उन्होंने कहा कि यह सपना सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि एक बेहतर दुनिया के लिए भी गारंटी है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग केवल अच्छे समय के लिए नहीं होता, उसे संकट के समय भी प्रभावी होना चाहिए। भारत दुनिया को मजबूत करने में मदद के लिए अपनी क्षमताएं और बढ़ा रहा है।