नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के नेता अभिजीत दीपके अदालत से छूटे ही थे। इसके बाद भी उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दोबारा प्रदर्शन करने का एलान कर दिया। रविवार को दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली कैंटोनमेंट स्थित एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत से रिहाई मिली। रिहाई के बाद दीपके ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने ऐसा कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है जिसमें विरोध न करने की बात हो और वे फिर सड़कों पर उतरेंगे। उनके मुताबिक पाबंदियां उन्हें आंदोलन से नहीं रोक पाएंगी।
सूत्रों का दावा, एक साल तक शांति भंग न करने की शर्त
सूत्रों के मुताबिक तीनों नेताओं की रिहाई इस शर्त पर हुई कि वे एक साल तक ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिसे शांति भंग करने वाला माना जाए। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि दीपके बॉन्ड या अंडरटेकिंग पर दस्तखत न करने की बात कर रहे हैं, जबकि सूत्र शर्त का जिक्र कर रहे हैं। रिहाई की शर्तें असल में क्या हैं, यह आधिकारिक आदेश से ही साफ होगा।
शनिवार को हिरासत, रविवार को एहतियातन गिरफ्तारी
जानकारी के मुताबिक तीनों नेताओं को शनिवार को दिल्ली में विमान से उतरने के बाद हिरासत में लिया गया था। रविवार सुबह उन्हें एहतियातन गिरफ्तार किया गया और फिर अदालत में पेश किया गया। इसके बाद उन्हें रिहाई मिली।
एसआईआर पर सवाल, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन
सीजेपी मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी एसआईआर में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। नेताओं की हिरासत और प्रदर्शनकारियों पर पाबंदी के आरोपों के बीच दीपके का यह बयान आया है। इसे आंदोलन जारी रखने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रशासन के रुख पर नजर
अब सबकी नजर इस पर है कि रिहाई की शर्तों को लेकर आधिकारिक आदेश में क्या लिखा है और पार्टी आगे कौन सी रणनीति अपनाती है। यह भी देखना होगा कि दोबारा प्रदर्शन की स्थिति में प्रशासन क्या रुख अपनाता है।