दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तिरंगा मार्च को लेकर शुक्रवार को कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में तनाव की स्थिति रही,। दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया । प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बढ़ाई गई, बैरिकेडिंग की गई और यातायात पर पाबंदियां लगाई गईं। इससे कनॉट प्लेस जैसे प्रमुख कारोबारी इलाके में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हुई।
नवरात्रि और दिवाली के त्योहारों से पहले बाजारों में बिक्री बढ़ने की उम्मीद कर रहे कारोबारियों का कहना है कि लगातार प्रदर्शनों और सुरक्षा इंतजामों के कारण ग्राहक बाजार आने से बच रहे हैं। हालांकि प्रदर्शनकारियों और व्यापारियों के बीच सीधे टकराव के दावे की पुष्टि अलग से जरूरी है।
कनॉट प्लेस और खान मार्केट में कारोबारियों की चिंता
नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने राजनीतिक दलों और प्रदर्शन करने वाले संगठनों से कनॉट प्लेस जैसे व्यस्त कारोबारी क्षेत्र के बजाय तय प्रदर्शन स्थलों पर जाने की अपील की है। एसोसिएशन का कहना है कि बार-बार के प्रदर्शनों सड़क बंद होने और यातायात प्रतिबंधों से दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, वेटर और दूसरे कामगारों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है।
खान मार्केट के कारोबारियों ने भी बिक्री में गिरावट की शिकायत की है। व्यापारियों के मुताबिक, त्योहारों के दौरान ग्राहकों की कम आवाजाही से नुकसान बढ़ रहा है। दूसरी ओर, CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि कारोबार पर असर शांतिपूर्ण प्रदर्शन से नहीं, बल्कि सुरक्षा के नाम पर शहर में आवाजाही रोकने से पड़ता है ।
SIR को लेकर विरोध
CJP का तिरंगा मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध से जुड़ा है। संगठन ने तिरंगा लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। दिल्ली पुलिस ने इलाके में निषेधाज्ञा लागू होने और कनॉट प्लेस के निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं होने का हवाला देते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की ।
प्रदर्शन से पहले CJP संस्थापक अभिजीत दिपके और छात्र नेता नेहा बोरा समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया। नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने प्रशासनिक कारणों से 16 और 17 अक्टूबर को कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क बंद रखने का फैसला भी किया ।
कारोबारियों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
प्रदर्शनों से कारोबार प्रभावित होने का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। व्यापारियों के संगठनों ने नुकसान और सेंट्रल पार्क बंद किए जाने को लेकर अदालत में याचिका दायर की। 16 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया और मामले को 26 अक्टूबर को सूचीबद्ध किए जाने की बात कही।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि सुनवाई में यह पाया जाता है कि कारोबारियों को गैरकानूनी तरीके से व्यापार से वंचित किया गया, तो मुआवजे पर विचार किया जा सकता है ।