नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन पीजी हादसे में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इमारत के मालिक हरिराम को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया है। हादसे के बादि से वह फरार चल रहा था। पुलिस अब उसे दिल्ली ला रही है। इस बीच मलबे में दबे लोगों की तलाश लगातार जारी है। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है।
हादसे और सर्चिंग के बीच बहुमंजिला पीजी इमारत के अचानक ढहने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी। रेस्कूय टीमों के साथ एनडीआरएफ, सीएटीएस एंबुलेंस और प्रशासन की कई टीमें मौके पर जुटी हुई हैं।
दो दिन से फरार था इमारत का मालिक
दिल्ली पुलिस के अनुसार, हरिराम हादसे के बाद से लगातार ठिकाना बदल रहा था। उसे पकड़ने के लिए दिल्ली पुलिस ने 10 टीमें लगाई थीं। इनमें स्थानीय पुलिस, स्पेशल स्टाफ और ऑपरेशन यूनिट के जवान शामिल थे। टीमों ने दिल्ली के साथ हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली -एनसीआर के कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी। आखिरकार पुलिस ने उसे भिवाड़ी से पकड़ा। अब उसे दिल्ली लाकर मामले में आगे की पूछताछ की जाएगी।
जिम्मेदार लोगों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर
इस मामले में साउथ कैंपस थाने में हरिरामि गुप्ता और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने बीएनएस की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। फरार होने के बाद लुकआउट नोटिस भी जारी किया था। साथ ही लगातार तलाश की जा रही है।
रेनोवेशन के दौरान ढहा था पूरा ढांचा
शुरुआती जांच में इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर चल रहे रेनोवेशन का मामला सामने आया है। आरोप है कि काम के दौरान पिलर और दीवारों के साथ छेड़छाड़ की जा रही थी और सुरक्षा मानकों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। हादसे के कुछ समय पहले तक नीचे एक बुजुर्ग अपना छोटा स्टाल लगाए बैठे थे। सामने आए सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देता है कि अचानक इमारत से धूल और मलबा गिरने लगता है। खतरा समझते ही बुजुर्ग वहां से भाग निकलते हैं। इसके कुछ सेकंड बाद पूरी इमारपत ढह जाती है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि रेनोवेशन के दौरान किन नियमों का उल्लंघन हुआ और इमारत की संरचना किस वजह से कमजोर हुई।
मलबे में दबे लोगों का रेस्क्यू जारी
सत्य निकेतन हादसे में मौतों का आंकड़ा 7 तक पहुंच चुका है। रेस्क्यू टीमों ने अब तक 11 लोगों को मलेब से सुरक्षित निकाल लिया है। हालांकि, अभी तक कई लोगों के अंदर फंसे होने की आशंका है। इनमें छात्रों के भी शामिल होने की बात सामने आई है। 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे पुलिस को पीसीआर कॉल के माध्यम से इमारत गिरने की सूचना मिली थी। पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर कुछ छात्रों के बाहर निकाला और अस्पताल भेजा। बाद में पता चला कि मलबे के नीचे और भी लोग फंसे हुए हैं।
बगल की इमारत भी बताई गई खतरनाक
हादसे के बाद आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ढही हुई इमारत के ठीक बगल वाले मकान को एमसीडी ने खतरनाक और जर्जर मानते हुए खाली कराने का नोटिस दिया है। एमसीडी ने डीएमसी एक्ट 1957 की धारा के तहत जारी नोटिस में मकान नंबर 13 को सुरक्षा के नजरिए से जोखिम वाला बताया है। मालिक और वहां रहने वालों को तीन दिन के भीतर ढांचा खुद हटाने का निर्देश दिया गया है ऐसा नहीं होने पर एमसीडी खुद कार्रवाई करेगा और खर्च मालिक वसूलेगा। इलाके के दूसरे पीजी और हॉस्टलों में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल सामने आए हैं। कुछ इमारतों में संकरे रास्ते, बंद निकास और खुले बिजली के तार जैसी समस्याएँ बताई गई हैं।
एमसीडी के 5 अधिकारी सस्पेंड
हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने पांच एमसीडी अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर शामिल हैं। सीएम रेखा गुप्ता ने मौके का जायजा लेने के साथ एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर घायलों से भी मुलाकात की। सरकार ने राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। हादसे को लेकर एबीवीपी ने भी एमसीडी की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं और एमसीडी कमिश्नर के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया है। अब पुलिस की जांच के साथ यह भी सामने आना बाकी है कि इमारत में हुए निर्माण या रेनोवेशन के दौरान किन स्तरों पर लापरवाही हुई।