केंद्र सरकार हवाई टिकटों के किराए को सीधे तय नहीं करेगी। नए नियमों के तहत सामान्य हालात में एयरलाइंस मांग और उपलब्ध सीटों के हिसाब से किराया तय कर सकेंगी। हालांकि आपात स्थिति में यात्रियों को मनमाने किराए से बचाने के लिए सरकार दखल दे सकती है।
16 अक्टूबर को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि हवाई किराए से जुड़े नए नियमों को अंतिम रूप दे दिया गया है और उन्हें प्रशासनिक मंजूरी भी मिल गई है। सरकार ने इन्हें दो हफ्ते के भीतर प्रकाशित करने की बात कही थी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को तय की है।
DGCA की निगरानी में रहेंगे किराए
मसौदे से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, एयरलाइंस को किराए की जानकारी पहले से DGCA को देनी होगी और अपनी वेबसाइट पर भी दिखानी होगी। नियामक यह निगरानी करेगा कि घोषित किराया नियमों के अनुरूप हो। हालांकि, नए नियमों की पूरी आधिकारिक अधिसूचना सामने आने के बाद ही इनके सटीक प्रावधान स्पष्ट होंगे ।
यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण की याचिका से जुड़ा है। याचिका में त्योहारों और छुट्टियों के दौरान टिकटों के बहुत महंगे होने और अतिरिक्त शुल्कों को लेकर चिंता जताई गई थी।
ATF महंगा होने से बढ़ा किराए का दबाव
हाल के दिनों में एअर इंडिया और इंडिगो ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतों के कारण ईंधन शुल्क बढ़ाया है। एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस के नए शुल्क 9 अक्टूबर से लागू हुए, जबकि इंडिगो ने 6 अक्टूबर से नए बुकिंग पर संशोधित शुल्क लागू किए। इससे यात्रियों के टिकट का कुल खर्च बढ़ सकता है ।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि एयरलाइंस की लागत और यात्रियों के हितों के बीच संतुलन बनाया जाए। फिलहाल नए नियमों के प्रकाशित होने का इंतजार है; तब तक किराए पर किसी नई सरकारी सीमा को लागू मानना सही नहीं होगा ।