मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को दिल्ली में फिर मार्च निकाला। संसद के संविधान सदन में बैठक के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और दूसरे INDIA ब्लॉक के नेता राष्ट्रपति भवन की ओर पैदल रवाना हुए। विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांगा था।
विपक्षी सांसद राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़ी अपनी चिंताएं रखेंगे। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी करेंगे।
चार दिन में तीसरी बार मार्च
विपक्षी सांसद पिछले कुछ दिनों से चुनाव आयोग और CEC के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। 6 अक्टूबर को ‘सेव डेमोक्रेसी’ मार्च निकाला गया था। इसके बाद 7 अक्टूबर को जंतर-मंतर की ओर जाते समय सांसदों को रोक दिया गया। 8 अक्टूबर को कनॉट प्लेस से राजघाट तक मार्च निकाला गया। शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च इस विरोध का तीसरा बड़ा मार्च बताया गया।
इस बार पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं। उनके साथ राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, सुप्रिया सुले, मनोज झा और उमर अब्दुल्ला सहित कई विपक्षी नेता मौजूद रहे।
विपक्ष ने क्या कहा?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि विपक्ष संविधान और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना चाहता है। उन्होंने बैलेट पेपर से चुनाव कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग भी उठाई। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा।
दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई गई
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सेंट्रल दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई और कई जगह बैरिकेड्स लगाए। रिपोर्ट के मुताबिक, 9 से 12 अक्टूबर के बीच बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की तैयारी की है। जंतर-मंतर और दूसरे प्रमुख इलाकों में भी सुरक्षा के इंतजाम किए गए।
इस बीच, CEC के खिलाफ हुए प्रदर्शनों को लेकर सात दिनों में 27 FIR दर्ज किए जाने की बात भी सामने आई। विपक्ष जहां SIR और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं प्रशासन की प्राथमिकता देश की राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।