कोटा। राजस्थान के कोटा मंडल के गुड़ला रेलवे स्टेशन पर बुधवार की सुबह हादसे जैसा नजारा देखने को मिला। मुंबई अमृतसर ट्रेन लाइन नंबर 4 पर खड़ी मालगाड़ी से टकराई और पैसेंजर ट्रेन के S-1 और S-2 कोच पटरी से उतरकर एक दूसरे के ऊपर चढ़ गए। शुरुआती सूचना में दो यात्रियों की मौत और चार गंभीर घायल होने की बात सामने आई। हालांकि राहत की बात यह रही कि यह असली हादसा नहीं था। पश्चिम मध्य रेलवे ने फुल स्केल आपदा प्रबंधन मॉक एक्सरसाइज के तहत यह काल्पनिक स्थिति तैयार की थी।
सुबह-सुबह अचानक गूंजा इमरजेंसी सायरन
दरअसल, सुबह ठीक 8:55 बजे रेलवे कंट्रोल रूम का इमरजेंसी सायरन बजा। सूचना मिलते ही राहत और बचाव कार्य शुरू हुआ। महज 20 मिनट के भीतर सुबह 9:15 बजे दुर्घटना राहत चिकित्सा यान मौके पर पहुंच गया। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, स्थानीय पुलिस और आरपीएफ के जवानों ने मोर्चा संभाल लिया।
कोटा के पास (दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग )गुडला स्टेशन पर दो ट्रेनों की टक्कर की ख़बर के बाद यात्रियों हड़कंप मच गया। कई यात्रियों के ज़ख़्मी होने की ख़बर के बाद कोटा से राहत और बचाव दल मौके पर पहुँचे हैं। डिब्बों में फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिशें जारी हैं। बचाव और राहत कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। नोट:- ये मॉक ड्रिल है। रेलवे आपात स्थिति में ख़ुद को तैयार रखने के लिए इस तरह की मॉक ड्रिल करता रहता है। कृपया इसे गंभीरता से न लें
— Babulal Dhayal Journalist (@BabulalDhayal18) October 7, 2026
गैस कटर से काटी गई बोगियां
बचाव दल ने गैस कटर से बोगियों को काटकर अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला। डॉक्टरों की टीम ने मौके पर ही प्राथमिक उपचार किया और गंभीर घायलों को तुरंत रेफर किया गया। इसके अलावा हादसे की खबर फैलते ही कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी और भरतपुर रेलवे स्टेशनों पर इमरजेंसी हेल्प डेस्क बनाए गए, ताकि परिजनों तक सटीक जानकारी पहुंच सके। रेलवे ने आपातकालीन तैयारियों और अलग-अलग एजेंसियों के तालमेल को परखने के लिए यह काल्पनिक परिदृश्य तैयार किया था।
सुबह 10:26 बजे समाप्त हुई मॉक ड्रिल
सुबह 10 बजकर 26 मिनट सीनियर मंडल संरक्षा अधिकारी पुरुषोत्तम मीणा ने मॉक ड्रिल के समापन की घोषणा की। इसके बादि डीआरएम कोटा अनिल कालरा, एनडीआरएफ के रामेश्वर यादव और एसडीआरएफ के अधिकारियों ने संयुक्त ब्रीफिंग कर पूरी कार्रवाई की समीक्षा की। अधिकारियों ने माना कि ऐसे मॉक ड्रिल से वास्तविक हादसों के दौरान रेस्क्यू समय को कम करने में बड़ी मदद मिलती है।