देश। भारत और चीन की सीमा ने जुड़े हालात पर रक्षा मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट में अहम जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC के सामने अपनी सैन्य तैनाती कम की है। अब उत्तरी सीमाओं और पारंपरिक ट्रेनिंग इलाकों में करीब 10 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड के बराबर चीनी बल मौजूद हैं।
हालांकि भारत की ओर से किसी तरह की ढिलाई नहीं दिखाई गई है। भारतीय सेना सभी LAC सेक्टर में मजबूत स्थिति में बनी हुई है और किसी भी संभावित चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत और चीन के बी राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर सकारात्मक बातचीत से उत्तरी सीमाओं पर स्थिति पहले के मुकाबले ज्यादा स्थिर हुई है।
फिर शुरू हुई सैन्य स्तर की बातचीत
सीमा पर तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य संवाद भी आगे बढ़ रहा है। इसमें अक्तूबर 2025 में पूर्वी लद्दाख में हुई 23वीं कोर कमांडर स्तर की बैठक शामिल है। इन वर्ताओं का मकसद सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों पर चर्चा करना और टकराव की स्थिति को कम करना है। इसके साथ ही दोनों देशों की सेनाओं के बीच बॉर्डर पर्सननल मीटिंग यानी BPM भी सभी सेक्टर में जारी है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन बैठकों का माहौल सोहार्दपूर्ण रहा है। दोनों पक्ष इन मुलाकातों के दौरान सीमा से जुड़े मुद्दे उठाते हैं। साथ ही उन्हें सुलझाने की कोशिश करते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बात सेना ने परखी अपनी तैयारी
रिपोर्ट में ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन ऑपरेशन ने भारत की मल्टी डोमेन क्षमता, मजबूत इंटेलिजेंस नेटवर्क, तकनीकी क्षमता और तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त ऑपरेशनल तैयारी को सामने रखा। ऑपरेशन के बाद सेना ने अपनी मौजूदा क्षमताओं के साथ उन क्षेत्रों की भी समीक्षा की, जहां सुधार की जरूरत थी। इसके बाद फोर्स रिस्ट्रक्चरिंग, तीनों सेनाओं के बीच ज्यादा जॉइंटनेस और नई तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर बढ़ाया गया।
बदलते खतरे के बीच लगातार मजबूत हो रही तैयारी
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, सीमा पर परिस्थितियाँ बदलने के साथ भारतीय सेना अपनी तैयारी को भी लगातार अपडेट कर रही है। चीन की तैनाती में कमी के बावजूद भारत ने एलएसी के सभी सेक्टर में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी है। इसका सीधा मतलब है कि बातचीत और सीमा पर स्थिरता की कोशिशों के साथ सैन्य तैयारी में कई जोखिम नहीं लेना चाहता। उत्तरी सीमाओं पर निगरानी और ऑपरेशनल क्षमता को मजबूत बनाए रखने पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है।