नई दिल्ली। ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को चुनाव आयोग ने नई राजनीतिक पहचान दे दी है। ममता गुट अब ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम से चुनाव लड़ेगा। इसके लिए उन्हें फुटबॉल खिलाड़ी वाला चुनाव चिह्न मिला है। वहीं, अरूप रॉय के नेतृत्व वाले ग्रुप को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम दिया गया है। साथ ही उसके लिए लिफाफा चुनाव चिह्न तय किया गया है।
क्यों बदला गया चुनाव चिह्न
चुनाव आयोग ने यह फैसला ऐसा समय में लिया है जब तृणमूल कांग्रेस के नाम और पुराने वाले चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों के बीच विवाद चल रहा है। आयोग ने फिलहाल मूल पार्टी के नाम और पारंपरिक फूल और घास वाले चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इसके बाद दोनों पक्षों से नए नाम और चुनाव चिह्न के लिए विकल्प मांगे गए थे। आयोग ने ममता बनर्जी को नेतृत्व वाले गुट के लिए ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम मंजूर किया है। इसके बाद फुटबॉल प्लेयर वाला चुनाव चिह्न दिया गया है।
अरूप रॉय ग्रुप अब डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस
दूसरी ओर अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम मिला है। इस गुट को लिफाफा चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। चुनाव आयोग के आदेश के अनुसार दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के तौर पर माना जाएगा। अरूप रॉय गुट के नाम और चुनाव चिह्न का फैसला भी आयोगी की ओर से मांगे गए विकल्पों के आधार पर किया गया। दोनों पक्षों को शुक्रवार सुबह तक तीन नाम और तीन चुनाव चिह्न के विकल्प देने को कहा गया था।
आगामी उपचुनाव में नए नाम से उतरेंगे दोनों गुट
चुनाव आयोग का यह फैसला आगामी उपचुनावों से पहले आया है। नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर होने वाले उपचुनाव में दोनों गुटों को अब अपने नए नाम और चिह्न के साथ चुनाव मैदान में उतरना होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन उपचुनावों के लिए मतदान 6 अक्टूबर को होना है। फिलहाल ये पहचान अंतरिम व्यवस्था के तौर पर लागू की गई है। मूल पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसला अभी बाकी है। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों के दावों और दस्तावेज के आधार पर आगे की प्रक्रिया जारी रखी है।
बता दें कि ममता गुट और अरूप रॉय ग्रुप के लिए यह बदलाव सिर्फ नाम और चिह्न तक सीमित नहीं है। आगामी उपचुनाव में भी मतदाताों के सामने दोनों पक्ष अलग राजनीतिक पहचान के साथ होंगे। आयोग ने ताजा आदेश के बाद अब आगामी चुनावी प्रक्रिया में दोनों गुटों की पहचान स्पष्ट हो गई है।