नई दिल्ली। देश में चुनाव आयोग को लेकर छिड़ी बहस अब और तेज हो गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके पहले ही मोर्चा खोल चुके हैं। इसी कड़ी में अब केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का बयान भी सामने आया है। इसमें उन्होंने चुनाव आयोग को नसीहत के अंदाज में सलाह दी है।
चिराग पासवान की दो टूक सलाह
लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने कहा कि आम जनता का चुनाव आयोग पर भरोसा बना रहना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार विपक्ष जो कुछ भी कहता है, उससे उन्हें कोई खास फर्क नहीं पड़ता क्योंकि आरोप-प्रत्यारोप लगाना राजनीतिक दलों की फितरत है। लेकिन अगर आम आदमी के मन में चुनावी प्रक्रिया को लेकर संदेह घर करने लगे, तो यह चिंता की बात है। चिराग ने साफ कहा कि ऐसे हालात में सीईसी और पूरे आयोग की जिम्मेदारी बनती है कि वे डटकर अपनी बात आम लोगों के सामने रखें और कोई शक बाकी न रहने दें।
पवन खेड़ा ने तालमेल पर उठाया सवाल
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी एक नया मुद्दा उठाया है। उनका आरोप है कि सीईसी और दोनों ईसी यानी चुनाव आयुक्तों के बीच आपसी तालमेल की कमी साफ दिखाई दे रही है। खेड़ा के अनुसार, साल 2025-26 में लगभग 50 अफसरों का तबदला हुआ। इनमें कई मुख्य निर्वाचन अधिकारी और उप चुनाव आयुक्त भी शामिल थे। मगर इनकी सबकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट यानी एसीआर अब तक लटकी पड़ी है। खेड़ा का तंज था कि जब रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज पर ही तीनों आयुक्तों में एकमत नहीं बन पा रहा है, तो इतने बड़े चुनाव को निष्पक्ष तरीके से संभालने पर भरोसा कैसे किया जाए।
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लगाए आरोप
इससे एक दिन पहले राहुल गांधी ने इस घटनाक्रम को लेकर गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और सीईसी पर निशाना साधा। उन्होंने तीनों पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि देश की चुनावी प्रणाली और लोकतांत्रिक ढांचे को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने सीईसी से तत्काल पद छोड़ने और सरकारी गवाह बनने तक की अपील कर डाली। इसके अलावा उन्होंने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु और विवेग जोशी का हवाला देते हुए कहा कि इन दोनों ने भी मतदाता सूची से नाम जोड़ने हटाने से जुड़े एसआईआर मुद्दे पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
सीजेपी की चुनाव बहिष्कार की सलाह
राहुल गांधी के अलावा सीजेपी के संस्थापक ने भी सीईसी के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने विपक्षी पार्टियों को सलाह दी कि अगर वाकई में उन्हें चुनाव धांधली का शक है तो उन्हें ऐसे चुनावों में भाग लेना बंद कर देना चाहिए क्योंकि लगातार हिस्सा लेते रहना असल में उस प्रक्रिया सको वैधता देता है। इतना ही नहीं दिपके ने चुनावी व्यवस्था की तुलना फिक्स्ड क्रिकेट मैच से करते हुए कहा कि मुकाबले को असली दिखाने के लिए कभी-कभार जानबूझकर विपक्ष को जीत भी दी जा सकती है।