राहुल गांधी ने दिल्ली में SIR के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि देश की आवाज सिर्फ कुछ राजनीतिक दलों के प्रदर्शन से तय नहीं होती, इस टकराव में कांग्रेस ने NSUI की युवा महिला कार्यकर्ताओं को सामने रखकर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि भाजपा ने राहुल गांधी के देश का प्रतिनिधित्व करने के दावे को चुनौती दी ।
राहुल गांधी ने छात्राओं के आरोपों को बनाया मुद्दा
14 अक्टूबर को राहुल गांधी ने अपने आवास पर NSUI के छात्र-छात्राओं और कार्यकर्ताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लेते समय उनके साथ मारपीट की, छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पिटाई से उनके कान को नुकसान पहुंचा और सुनने की क्षमता प्रभावित हुई। एक अन्य कार्यकर्ता ने भी चेहरे पर चोट लगने का आरोप लगाया ।
राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों से वीडियो और दूसरे सबूत सुरक्षित रखने को कहा उन्होंने दावा किया कि इन सबूतों के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।
अमित शाह का जवाब- देश की आवाज गांवों में भी
इससे पहले अमित शाह ने विपक्ष के SIR विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधते हुए कहा था कि देश की आत्मा गांवों, खेतों, किसानों, जंगलों और दूर-दराज के इलाकों में बसती है, उन्होंने सवाल उठाया कि कुछ राजनीतिक दलों के प्रदर्शन से किसी नेता को पूरे देश की आवाज नहीं माना जा सकता ।
SIR पर सियासी टकराव तेज
दरअसल, SIR को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच टकराव अब सड़क से राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंच गया है। कांग्रेस पुलिस कार्रवाई और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है, जबकि भाजपा विपक्ष के आंदोलन की व्यापकता पर सवाल कर रही है। अब इस विवाद में पुलिस पर लगे आरोपों की जांच और SIR को लेकर उठे सवाल अहम रहेंगे ।