नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी मंगलवार को दिल्ली की सड़कों पर पुलिस से सीधे भिड़ते नजर आए। विपक्ष के सेव डेमोक्रेसी मार्च को रोका गया तो राहुल पहले सड़क पर धरने पर बैठे, फिर बैरिकेड पर चढ़ गए और ऊपर खड़े होकर तिरंगा लहराया। प्रियंका गांधी भी उनके साथ थीं। इसके बाद दोनों पुलिस को चकमा देकर आकाशवाणी भवन के अंदर पहुंच गए।
संसद से शुरू हुआ मार्च, रास्ते में लगी भारी बैरिकेडिंग
मंगलवार सुबह विपक्षी सांसदों ने संसद से निर्वाचन सदन की ओर कूच किया। निर्वाचन सदन यानी चुनाव आयोग का मुख्यालय। लेकिन दिल्ली पुलिस ने पहले से ही रास्ता सील कर रखा था। संसद मार्ग पर नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के बीच वाले हिस्से में कड़े बैरिकेड लगाए गए थे।
मार्च रुका तो राहुल गांधी सड़क पर ही बैठ गए। कुछ देर बाद वे अचानक उठे और बैरिकेड पर चढ़ गए। उनके पीछे कई युवा सांसद भी चढ़ते दिखे। इसी बीच राहुल ने सोशल मीडिया पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाते हुए लिखा कि ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो, टाइम टू रिजाइन। विपक्षी नेताओं ने वोट चोर, गद्दी छोड़ के नारे भी लगाए।
Rahul Gandhi Climbs Barricade In Massive INDIA Bloc Protest Against Gyanesh Kumar https://t.co/Glc0K1tTK7
— Shakeel Yasar Ullah (@yasarullah) October 6, 2026
हिरासत, बस और फिर आकाशवाणी भवन का रिसेप्शन गेट
पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी समेत कई सांसदों को हिरासत में लिया। सभी को बस में बैठाकर ले जाने की कोशिश हुई, लेकिन सांसदों ने बस ही रुकवा दी। फिर राहुल और प्रियंका बस से उतरे और आकाशवाणी भवन के रिसेप्शन गेट से सीधे अंदर चले गए। वहां वे एक पेड़ के नीचे बैठ गए।
चुनाव आयोग का मुख्यालय यहां से करीब 270 मीटर दूर है। विपक्ष का कहना है कि वह शांतिपूर्ण मार्च करना चाहता था, मगर भारी पुलिस तैनाती और बैरिकेडिंग से हालात तनावपूर्ण हो गए। पुलिस अब भी सभी नेताओं को हिरासत में लेना चाहती है, जबकि कांग्रेस के कई बड़े नेता भवन के भीतर ही डटे हैं।
क्या है SIR विवाद, जिस पर मचा है बवाल
विपक्ष का आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया में वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम काटे गए और फॉर्म 6 में भी बदलाव हुए। उसका कहना है कि इससे वोट चोरी का खतरा खड़ा हो गया है। SIR की शुरुआत जून 2025 में बिहार से हुई थी और बाद में यह 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक पहुंची। आंकड़ों के मुताबिक ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13 करोड़ से ज्यादा नाम ASDD कैटेगरी में डाले गए। इसका मतलब है अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट। चुनाव आयोग का कहना है कि यह अंतिम सूची नहीं है और छूटे हुए मतदाताओं के लिए विशेष अभियान चल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद तेज हुई इस्तीफे की मांग
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने फॉर्म 6 का कोई संशोधित संस्करण मंजूर नहीं किया है। कोर्ट रिकॉर्ड देखकर पता लगाएगा कि बदलाव किसने और कैसे किए। इसके बाद विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और तेज कर दी। ममता बनर्जी ने साफ कहा कि जब तक CEC इस्तीफा नहीं देते, प्रदर्शन चलता रहेगा।