मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत पर की गई टिप्पणियों को लेकर शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आपराधिक अवमानना याचिका दाखिल की गई है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने यह याचिका अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी की सहमति मिलने के बाद दाखिल की ।
SCBA का आरोप है कि दोनों की टिप्पणियों से सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई । हालांकि याचिका दाखिल होना अपने आप में अदालत की ओर से आरोपों को सही ठहराना नहीं है ।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 12 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से CJI के इनकार के बाद शुरू हुआ। CJI ने मुलाकात से इनकार करते हुए कहा था कि संबंधित मुद्दे अदालत में विचाराधीन हैं और न्यायपालिका को अपनी संवैधानिक सीमाओं का ध्यान रखना होता है।
SCBA की याचिका के मुताबिक इसके बाद संजय राउत ने न्यायाधीशों को लेकर सोशल मीडिया पर टिप्पणियां कीं । एसोसिएशन ने इन बयानों को गलत और रिकॉर्ड के विपरीत बताया। याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के 19 जून 2026 के आदेश का भी हवाला दिया गया है ।
अटॉर्नी जनरल ने क्या कहा?
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने 15 अक्टूबर को आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति दी थी, उनके अनुसार, दोनों की पोस्ट प्रथम दृष्टया सुप्रीम कोर्ट और CJI की प्रतिष्ठा कम करने वाली थीं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, निखिल वागले ने अपनी पोस्ट हटा दी और 15 अक्टूबर को अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर CJI तथा सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी भी मांगी । फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार SCBA ने अवमानना याचिका दाखिल की है।