नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हिंदी दिवस पर हिंदी जन सूचना सेवा शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों और आदेशों का आसान हिंदी में सार आम लोगों को तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही रोजाना 15 से 30 मिनट का हिंदी ऑडियो और वीडियो बुलेटिन जारी होगा।
कानूनी भाषा को आसान बनाने की कोशिश
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य न्यायिक जानकारी को आम लोगों के लिए ज्यादा सहज बनाना है। लंबे औ जटिल कानूनी दस्तावेजों को समझने में जिन लोगों को परेशानी होती है, उनके लिए हिंदी में तैयार सार काफी उपयोगी होगा। साथ ही ऑडियो वीडियो बुलेटिन में संबंधित फैसले का अधिकारिक लिंक भी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे आम लोग आसान भाषा में जानकारी लेने के बाद मूल फैसला भी देख सकेंगे। यह सुविधा खास तौर पर आम नागरिकों, वादकारियों और दिव्यांगजनों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।
आगे दूसरी भारतीय भाषाओं में भी मिलेगी सुविधा
चीफ जस्टिस सूर्य कांत की पहल पर शुरू की जा रही इस सेवा का दायरा आगे बढ़ाने की तैयारी है। सु्प्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि आने वाले समय समें ऐसी सुविधा दूसरी भारतीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराई जाएगी। इस कदम के पीछे सोच यही है कि अदालत के फैसले सिर्फ कानूनी विशेषज्ञों तक सीमित न रहे। लोग अपनी भाषा में उन्हें समझ सकें और न्यायिक प्रक्रिया से बेहतर तरीके से जु़ड़ सकें।
पहले से चल रहा है भारतीय भाषाओं पर काम
सुप्रीम कोर्ट पहले से ही फैसलों को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने पर काम कर रहा है। इसके लिए कोर्ट ने सुवास यानी सुप्रीम कोर्ट विधिक अनुवाद सॉफ्टवेयर नाम का एआई आधारित अनुवाद सॉफ्टवेयर विकसित किया है। इसकी मदद से सु्प्रीम कोर्ट के फैसलों का हिंदी, तमिल, तेलुगु, बंगाली और कन्नड़ समेत कई भाषाओं में अनुवाद किया जा रहा है।
30 हजार से ज्यादा फैसलों का हिंदी अनुवाद
सुप्रीम कोर्ट ने अनसुार, अब तक करीब 30 हजार फैसलों का हिंदी में अनुवाद हो चुका है। बड़ी संख्या में फैसले ई-एससीआर पर उपलब्ध हैं। संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य भाषाओं में भी फैसलों के अनुवाद की व्यवस्था की गई है। कोर्ट की वेबसाइट पर फैसलों के अधिकारिक क्षेत्रीय अनुवाद भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हिंदी जन सूचना सेवा इसी प्रयास को आगे बढ़ाएगी। जरूरी व्यवस्थाएँ पूरी होने के बाद यह सेवा जल्द शुरू की जाएगी।