नई दिल्ली। यूपीआई से भुगतान करने वालों और दुकानदारों के लिए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से एक अहम खबर सामने आई। अदालत ने यूपीआई लेन-देन पर शुल्क लगाने के फैसले पर फिलहाल रोक लगाने से मना कर दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, आरबीआई और एनपीसीआई को नोटिस जारी करके जवाब भी तलब किया है। यानी शुल्क का फैसला अभी लागू रहेगा। लेकिन सरकार को अदालत में अपना पक्ष रखना होगा।
सुनवाई में क्या हुआ?
दरअसल, सोमवार को यूपीआई चार्ज से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में यूपीआई ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने वाले गजट नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने मामले को सुना, याचिका एडवोकेट अंजन दत्ता ने दायर की है। पीठ ने अंतरिम रोक की मांग तो नहीं मानी, पर नोटिस जारी कर दिया।
सरकार को देना होगा हलफनामा
अदालत ने केंद्र सरकार से हलफनामा दाखिल करने को कहा है। इसमें सरकार को बताना होगा कि उसने 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई लेन-देन पर शुल्क लगाने का फैसला किस आधार पर लिया। केंद्र के साथ आरबीआई और एनपीसीआई को भी नोटिस भेजा गया है। अब इन तीनं के जवाब के बाद ही आगे की सुनवाई में तस्वीर साफ होगी।
शुल्क को लेकर बढ़ता विरोध
बता दें कि यूपीआई शुल्क का मुद्दा सिर्फ अदालत तक सीमित नहीं है। कई जगह व्यापारी संगठन इसके विरोध में उतर आए हैं। गाजियाबाद में व्यापार मंडल ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। नीति आयोग ने पूर्व उपाध्यक्ष ने भी शुल्क को लेक सरकार को चेतावनी दी है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी।