चेन्नई। तमिलनाडु में टीवीके सरकार को विपक्ष की तीखी आलोचना के बाद आखिरकार झुकना पड़ा है। सरकार ने लॉ एंड ऑर्डर से जुड़े सार्वजनिक विभाग को सूचना के अधिकार यानी आरटीआई 2005 के दायरे से बाहर रखने वाला अपना आदेश वापस ले लिया है। इससे पहले सरकार ने इस फैसले को सही ठहराते हुए तर्क दिया था कि यह विभागि एक इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशन की तरह काम करता है। इसलिए इसे छूट दी जानी चाहिए।
क्या था पूरा विवाद समझिए
टीवीके सरकार की ओर से जारी ताजा बयान में साफ किया गया है कि ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट का 21 सितंबर 2006 का पुराना सरकारी आदेश, जो आरटीआई अधिनियम की धाराओं के तहत पब्लिक लॉ एंड ऑर्डर डिपार्टमेंट को छूट देता था। अब इसे रद्द कर दिया गया है। दरअसल, पब्लिक लॉ एंड ऑर्डर का दायरा काफी व्यापक है। इसमें पुलिस फायरिंग, कस्टडी में मौत, पुलिस टॉर्चर जैसे संवेदनशील मामलों की जांच रिपोर्ट भी शामिल होती हैं। पुराने आदेश के चलते ऐसी जानकारियाँ जनता तक पहुंच नहीं पाती थीं।
जनता को दिक्कत तो होगी समीक्षा
टीवीके सरकार में मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने इस मसले पर पहले ही साफ किया था कि अगर जनता इस फैसले से संतुष्ट नहीं है तो इस पर दोबारा विचार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि आरटीआई के तहत सिर्फ सामुदायिक विवादों से जुड़ी घटनाओं की जानकारी रोकी जाएगी। इसकी वजह है कि बड़ी संख्या में लोग ऐसे संवेदनशील मामलों में ही आरटीआई का सहारा ले रहे थे। मंत्री के अनुसार लॉ एंड ऑर्डर विभाग के अंतर्गत कुल बीस सेक्शन आते हैं। इनमें से चुनिंदा सेक्शन को ही छूट दी गई थी। उन्होंने पहले ही संकेत दे दिया था कि अगर आम जनता को इससे परेशानी होती है तो मामला मुख्यमंत्री तक ले जाया जाएगा।
विपक्ष ने बताया था कि पुलिस स्टेट बनाने की कोशिश
इस फैसले के सामने आते ही विपक्षी खेमे से तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई थीं। सीपीएम सांसद वेंकटेशन ने इसे तमिलनाडु को एक पुलिस स्टेट में तब्दील करने की सीधी कोशिश करार देते हुए सरकार से तत्काल आदेश वापस लेने की मांग की थी। हालांकि टीवीके के ही एक अन्य मंत्री राज मोहन ने सफाई दी थी कि इस फैसले से अभिव्यक्ति की आजादी पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा।
वहीं, कांग्रेस सांसद कीर्ति चिदंबरम ने भी इस कदम को गलत मिसाल बताते हुए कहा था कि आरटीआई कानून यूपीए सरकार का एक अहम और ऐतिहासिक फैसला रहा है। इसका मकसद लोकतांत्रिक जवाबदेही को मजबूत बनाना था। ऐसे में इसके दायरे को सीमित करने के बजाय बढ़ाया जाना चाहिए था।