नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च लोकसेवा भर्ती संस्था संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर गुरुवार, 1 अक्टूबर को शताब्दी समारोह मनाएगा। नई दिल्ली के भारत मंडपम में सुबह 11 बजे आयोजित होने वाले समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।
प्रधानमंत्री इस अवसर पर यूपीएससी की शताब्दी को समर्पित स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी करेंगे। साथ ही आयोग के 100 वर्षों के सफर और उसके न्यायिक एवं संवैधानिक महत्व से जुड़ी एक विशेष पुस्तक ‘100 लैंडमार्क जजमेंट शापिंग थे पॉलिसीज़ ऑफ़ यूपीएससी एंड पब्लिक सर्विस’ का भी विमोचन किया जाएगा।
1 अक्टूबर 1926 को हुई थी स्थापना
यूपीएससी की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को भारत में पहली लोक सेवा आयोग के रूप में हुई थी। इसकी स्थापना भारत सरकार अधिनियम, 1919 के प्रावधानों और 1924 के ली आयोग की सिफारिशों के बाद हुई। वर्ष 1937 में इसका नाम फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन किया गया और संविधान लागू होने के बाद 26 जनवरी 1950 को इसे संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) का वर्तमान स्वरूप मिला।
यूपीएससी देश के प्रशासनिक तंत्र के लिए अधिकारियों के चयन की महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है। सिविल सेवा परीक्षा समेत विभिन्न केंद्रीय सेवाओं के लिए चयन प्रक्रिया में आयोग की प्रमुख भूमिका रहती है।
यूपीएससी ने अपने शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की शुरुआत 1 अक्टूबर 2025 को 99वें स्थापना दिवस के अवसर पर की थी। आयोग ने पूरे एक वर्ष तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए। इनका समापन अब 1 अक्टूबर 2026 को भारत मंडपम में होने वाले मुख्य समारोह के साथ होगा।
आयोग के अनुसार, शताब्दी वर्ष का उद्देश्य लोकसेवा में योग्यता, निष्पक्षता और सार्वजनिक सेवा की प्रतिबद्धता की एक सदी की यात्रा को रेखांकित करना है।
मेरिट से लोकसेवा तक का सफर
यूपीएससी की परीक्षा देश के युवाओं के लिए लंबे समय से सार्वजनिक सेवा में प्रवेश का प्रमुख माध्यम रही है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय विदेश सेवा (IFS) सहित विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में अधिकारियों के चयन में आयोग की भूमिका रहती है।
एक सदी के दौरान आयोग की चयन प्रणाली में समय के साथ बदलाव हुए हैं। बदलती प्रशासनिक जरूरतों, तकनीक और पारदर्शिता की अपेक्षाओं के अनुरूप परीक्षा एवं चयन प्रक्रिया में भी कई सुधार किए गए हैं।
संविधान के अनुच्छेद 315 से 323 में संघ और राज्यों के लोक सेवा आयोगों से संबंधित प्रावधान किए गए हैं। यूपीएससी को संवैधानिक संस्था का दर्जा प्राप्त है। आयोग की सलाह और चयन संबंधी प्रक्रियाएं केंद्र सरकार के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।
समारोह में कौन होगा शामिल
शताब्दी समारोह ऐसे समय हो रहा है जब देश में प्रशासनिक सेवाओं में तकनीक, डिजिटल गवर्नेंस, पारदर्शिता, दक्षता और बदलती शासन व्यवस्था के अनुरूप अधिकारियों की भूमिका लगातार बदल रही है।
प्रधानमंत्री के संबोधन के साथ होने वाले समारोह में यूपीएससी के वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों, सदस्यगण, अधिकारियों तथा लोकसेवा से जुड़े लोगों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में आयोग की एक सदी की यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की चुनौतियों को भी रेखांकित किया जाएगा।
इस तरह 1 अक्टूबर का समारोह केवल यूपीएससी के 100 वर्ष पूरे होने का उत्सव नहीं, बल्कि देश की लोकसेवा चयन व्यवस्था की एक सदी की संस्थागत यात्रा का भी महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।