नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार 17 सितंबर को 76 साल के हो गए। देश के कोने-कोने से और विदेश से भी उन्हें बधाईयाँ मिल रही हैं। इस भारत में मौजूद अमेरिकी दूतावास ने भी सोशल मीडिया एक्स पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से शुभकामानाएँ भेजीं। लेकिन यही पोस्ट अब विवाद की वजह बन गई है। वजह साफ है क्योंकि ठीक एक दिन पहले अमेरिका एक कानून पास हुआ है। इस कानून के तहत भारत पर अब 100 प्रतिशत ट्रैरिफ लग सकता है। लोगों को यह बधाई नागवार गुजरी और कमेंट में गुस्सा फूट पड़ा।
दूतावास की पोस्ट में क्या लिखा
अमेरिकी दूतावास ने एक्स पर लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं देते हैं। पोस्ट में आने वाले साल में उनके बेहतर स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना भी की गई। कूटनीतिक लिहाज से देखें तो यह एक सामान्य औपचारिक संदेश था। लेकिन टाइमिंग ऐसी रही कि संदेश की भावना पीछे छूट गई और टैरिफ का मुद्दा आगे आ गया।
On behalf of President Donald Trump, we wish Prime Minister @narendramodi a very Happy Birthday.
Wishing you all the health and happiness in the coming year! https://t.co/5xh2c2oEhj
— U.S. Embassy India (@USAndIndia) September 17, 2026
यूजर्स ने बधाई को बताया तोहफा नहीं तंज
पोस्ट के नीचे आने वाले कमेंट तीखे रहे। एक यूजर ने लिखा कि 100 फीसदी टैरिफ और भारतीय मूल के अमेरिकियों पर हमलों के साथ जन्मदिन मुबारक, बहुत बढ़िया। वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा कि जन्मदिन का तोहफा तो भारत पर 100 फीसदी टैरिफ ही है। तीसरे यूजर ने और सीधी बात कही। उसने लिखा कि आपकी शुभकामनाओं की परवाह कौन करता है, कल ही तो आपने भारत पर 100 फीसदी टैरिफ थोप दिया। आप एक बुरे देश हो। कुल मिलाकर सोशल मीडिया पर लोगों ने बधाई को दिखावा बताया।
On behalf of President Donald Trump, we wish Prime Minister @narendramodi a very Happy Birthday.
Wishing you all the health and happiness in the coming year! https://t.co/5xh2c2oEhj
— U.S. Embassy India (@USAndIndia) September 17, 2026
आखिर क्या है यह नया कानून
दरअसल, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस और ईरान पर प्रतिबंध से जुड़े लिंडसे ओ ग्राहम अधिनियम, 2026 को मंजूरी दी है। इस कानून के तहत जो देश रूस और ईरान से तेल और गैस खरीदेंगे, उन पर ट्रंप 100 फीसदी तक टैरिफ लगा सकते हैं। भारत लंबे समय से रूस से कच्चा तेल खरीदता रहा है। इसलिए इस कानून का असर सीधे भारत पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यही वजह है कि आम लोगों ने भी इसे भारत के खिलाफ कदम के तौर पर देखा।
भारत सरकार की तरफ से क्या जवाब आया
भारत सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम पर संयम भरा लेकिन साफ जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि सरकार ने अमेरिकी कांग्रेस में रूस और ईरान पर प्रतिबंध वाले कानून के पारित होने का संज्ञान लिया है और आगे की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। यानी भारत ने तीखी प्रतिक्रिया देने के बजाय अपनी जरूरत और प्राथमिकता को सामने रखा। दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर बहस अभी थमी नहीं है और जन्मदिन की एक बधाई दो देशों के मौजूदा रिश्तों की तस्वीर बयां कर रही है।