विदेश। यूनाइटेड नेशनल जनरल असेंबली के मौके पर मंगलवार को न्यूयॉर्क में अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम बैठक हुई। दोनों देशों के अधिकारी करीब तीन घंटे तक आमने-सामने बातचीत की मेज पर रहे। इस दौरान अमेरिकाय की ओर से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ मौजूद रहे तो ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पक्ष रखा। कतर के अधिकारियों ने इस पूरी बातचीत में मध्यस्थ की भूमिकी निभाई।
प्रेसिडेंट ट्रम्प ने बातचीत को पॉजिटिव बताया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बैठक के बाद कहा कि बातचीत का माहौल अच्छा रहा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों पक्ष जल्द ही एक बार फिर मिलेंगे। द गार्डियन की रिपोर्ट का हवाला दें तो एक सीनियर ईरानी अधिकारी ने साफ कर दिया कि अगर अमेरिका सैन्य और आर्थिक मोर्च पर दबाव कम करता है तो ईरान एक हफ्ते के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल सकता है।
सीधी मुलाकात नहीं, मध्यस्थों के जरिए चली बात
दिलचस्प बात यह रही कि विटकॉफ और अराघची की आमने-सामने मुलाकात नहीं हुई। विटकॉफ ने पहले तो कहा कि उन्हें बातचीत को लेकर अच्छा अनुभव रहा। लेकिन बाद में उन्होंने यह स्पष्ट किया कि सीधी बातचीत नहीं हुई थी, बल्कि मध्यस्थ दिनभर दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान कराते रहे। इस पूरी प्रक्रिया में ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल रहे। विटकॉफ के अनुसार, बातचीत का एक चरण पूरा हो चुका है और आगे भी मध्यस्थ दोनों देशों के बीच संपर्क बनाए रखेंगे।
ट्रंप की दो टूक, डील करो वरना अंजाम भुगतो
यूएन के मंच से ट्रंप ने ईरान को सीधी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान के सामने अब सिर्फ दो रास्ते बचे हैं। या तो अमेरिका से समझौता करे या फिर सख्त सैन्य कार्रवाई झेलने को तैयार रहे। ट्रम्प ने आगे कहा कि अगर बातचीत नाकाम रही और तनाव बना रहा तो अमेरिका ईरान को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। उनका कहना था कि अमेरिका अपनी ताक के दम पर शांति चाहता है। लेकिन इसके लिए ईरानन को बातचीत की मेज पर लौटकर होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खोलनी होगी।
ईरान ने रखी अपनी शर्तें
ईरान में भी इस मुद्दे पर अपना रुख साफ कर दिया है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अराघची ने अमेरिकी पक्ष के सामने कुछ शर्तें रखीं। इनमें नौसैनिक नाकाबंदी तुरंत हटाना, विदेश में फ्रीज पड़ी ईरानी संपत्तियों को रिहा करना और लेबनान सहित सभी मोर्चों पर जारी संघर्ष को खत्म करना शामिल है।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्थ और रणनीतिक रूप से अहम तेल मार्गों में गिना जाता है। यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। बता दें कि इसी रास्ते से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का आयात-निर्यात होता है। यही वजह है कि इसका खुलना या बंद रहना वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा असर डालता है।