विदेश। रूस के साथ भारत के रिश्तों को लेकर अमेरिका का दबाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी सीनेट से रूस प्रतिबंधित विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद अब सांसदों के एक समूह ने इसमें बदलाव की मांग की है। प्रस्तावित संसोधन में रूस से तेल खरीदने वाले देशों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज करने और उनमें भारत को शामिल करने की बात कही गई है।
बता दें कि अगर यह विधेयक आगे बढ़ता है और प्रस्तावित प्रावधान लागू होते हैं तो रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है। भारत का नाम इस सूची में शामिल किए जाने की मांग ऐसे समय में हुई है। जब भारत और रूस के बीच पुराने रणनीतिक और कारोबारी संबंध लगातार चर्चा में हैं।
रूस से तेल खरीद को लेक भारत पर पहले भी निशाना
बता दें कि अमेरिका लंबे समय से भारत के रूस से कच्चा तेल खरीदने पर सवाल उठाता रहा है। अमेरिकी पक्ष का आरोप है कि भारत रूस से तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से यू्क्रेन युद्ध के दौरान उसकी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहा है। इसी मुद्दे को आधार बनाकर अमेरिका पिछले साल भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा चुका है। हालांकि, भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेगा। अब प्रस्तावित रूस प्रतिबंध विधेयक के जरिए भारत, चीन और दूसरे देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का रास्ता तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
क्या है लिंडसे ओ ग्राहम रूस सैंक्शन बिल?
अमेरिकी सीनेट ने अगस्त में रूस प्रतिबंध विधेयक को 86-11 के भारी बहुमत से मंजूरी दी थी। अब इसकी प्रक्रिया हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में आगे बढ़नी है। रिपोर्ट के अनुसार, इश विधेयक का नाम दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में रखा गया है। ग्राहम भारत के मुखर आलोचकों में गिने जाते थे। इतना ही नहीं भारत पर अधिक टैरिफ लगाने की पैरवी करते रहे थे। बता दें कि इस साल उनका निधन हो गया था।
जानकारी के अनुसार, इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव बढ़ाना और उसके कथित शैडो फ्लीट यानी ऐसे जहाजी बेड़े को निशाना बनाना है, जिसका इस्तेमाल रूस पर लगे प्रतिबंधों को दरकिनार कर तेल के कारोबार के लिए किए जाने का आरोप है।
बिल में भारत और चीन का नाम जोड़ने की मांग
अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले इस विधेयक में कई संसोधन प्रस्तावित किए गए हैं। डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर ने मांग की है कि रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों का नाम विधेयक में साफ तौर पर दर्ज किया जाए। पहले प्रस्तावित कानून में केवल रूस से तेल खरीदने वाले देशों का सामान्य तौर पर जिक्र था। अब संसोधन के जरिए भारत और चीन का नाम सीधे शामिल करने की मांग की गई है। होयर ने मांग की है कि रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले 10 देशों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध किया जाए और उन पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाया जाए। इस प्रस्तावित सूची में भारत, चीन, तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, कजाखिस्तान, सिंगापुर और किर्गिस्तान शामिल हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में रूस से होने वाली तेल खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंध या अतिरिक्त टैरिफ का असर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के साथ-साथ ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। फिलहाल बड़ा सवाल यह है कि अमेरिकी सांसद में यह संसोधन किस रूप में आगे बढ़ता है और क्या भारत का नाम अंतिम विधेयक किस रूप में आगे बढ़ता है और क्या भारत का नाम अंतिम विधेयक में शामिल किया जाता है। बिल को अभी हाउस ऑफ रिप्रेंजेंटेटिव में आगे की प्रक्रिया से गुजरना है।