न्यूज11 भारत
धनबाद/डेस्क: धनबाद स्थित केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान (CSIR-CIMFR) के बहुचर्चित 139 करोड़ के मानदेय घोटाले (Honorarium Scam) के मुख्य आरोपी और पूर्व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह को झारखंड हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. झारखंड उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों को देखते हुए उनकी याचिका को खारिज कर दिया है.
केंद्रीय एजेंसी की जांच के बीच नहीं मिली राहत
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी (RC 04-23-D) के बाद डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कानूनी राहत के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया था. इससे पहले CBI की टीम उनके धनबाद और नोएडा स्थित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर चुकी है, जिसमें भारी मात्रा में अचल संपत्तियों और बैंक खातों से जुड़े अहम दस्तावेज बरामद किए गए थे. अदालत में सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए दलील दी कि पद का दुरुपयोग कर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया है, इसलिए आरोपी को किसी भी तरह की अंतरिम राहत या छूट नहीं दी जानी चाहिए.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला CSIR-CIMFR धनबाद में नियमों को ताक पर रखकर वैज्ञानिकों और अधिकारियों के बीच अवैध रूप से 139 करोड़ की भारी-भरकम राशि का मानदेय बांटने और खुद हड़पने से जुड़ा है. सीबीआई ने इस घोटाले में संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. पी.के. सिंह और मुख्य वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह को मुख्य नामजद आरोपी बनाया है. विभागीय स्तर पर कड़ा रुख अपनाते हुए संस्थान ने एक अन्य आंतरिक मामले (महिला कर्मचारी से दुर्व्यवहार) में उन्हें अप्रैल 2024 में पहले ही जबरन सेवानिवृत्त (Forced Retirement) कर दिया था. अब उच्च न्यायालय से याचिका खारिज होने के बाद डॉ. अशोक कुमार सिंह की कानूनी मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं, और केंद्रीय एजेंसी आने वाले दिनों में अपनी कार्रवाई तेज कर सकती है.
यह भी पढ़ें- चास नगर निगम की कार्रवाई: The Charcoal junction रेस्टोरेंट में मिली भारी गंदगी, ₹10 हजार का जुर्माना