रोहन निषाद/न्यूज11 भारत
चाईबासा/डेस्क: पश्चिमी सिंहभूम में गुरु जी के प्रतिमा लगाने को लेकर विवाद मामले पर बयान बाजी हो गई है तेज, ईचा खरकई बांध विरोधी संघ कोल्हान, आदिवासी हो समाज युवा महासभा एवं अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक रूप से अपनी मांग कर रहे थे. एकतरफा कार्यवाही करते हुए जिला प्रशासन द्वारा सामाजिक अगुवाओं को बलपूर्वक हिरासत में नज़रबंद किए जाने पर संघ के अध्यक्ष बिरसिंह बिरुली ने घोर निंदा करते हुए कड़ी नाराजगी जताई. उनका आरोप है कि समाज की ओर से पूर्व में ही प्रशासन को लिखित मध्यस्थता एवं वार्ता के लिए सूचना देते अनुरोध किया जा चुका था. बावजूद इसके प्रशासन ने सत्ता पक्ष राजनीतिक पार्टी के दबाव में एकतरफा कार्रवाई कर कोल्हान के आदिवासियों की आवाज को बलपूर्वक दबाने का कार्य किया है. हालांकि सामाजिक संगठनों के द्वार दबाव बनाए जाने के उपरांत रात के बारह बजे सत्तरह सामाजिक अगुवाओं को हिरासत से रिहा कर दिया गया. शांतिपूर्ण तरीके से अपने पूर्वजों के सम्मान के लिए आवाज़ उठाने वालों को दबाना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है.आंदोलनकारियों को हिरासत में लेकर नजरबंद किया गया. उनके अनुसार, यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की भावना के विपरीत है.
वीर सिंह ने कहा क्या आदिवासी समाज को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं ? उन्होंने कहा कि इक्कीसवीं सदी में भी यदि आदिवासी समाज को अपनी आवाज उठाने के कारण हिरासत में लिया जाता है, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है. यदि सरकार और झामुमो जिलाध्यक्ष अपने ही राज्य व जिला के अमर शहीदों को उचित सम्मान नहीं दे सकती है, तो 'अबुआ सरकार' का टैग लेकर घूमना महज़ एक छलावा और दिखावा है.
कोल्हान की माटी ने कभी गुलामी स्वीकार नहीं की न अंग्रेज़ों की, और न ही किसी सत्ता की तानाशाही की. आज 'हो' समाज और कोल्हान का हर नागरिक अपने स्वाभिमान, अपनी संस्कृति और अपने शहीदों के सम्मान के लिए एकजुट हो चुका है. कोल्हान की जनता अब किसी राजनीतिक दल की तानाशाही या थोपी गई व्यवस्था को बर्दाश्त नहीं करेगी. अपने पूर्वजों के हक और अधिकार के लिए यह आवाज़ और मुखर होगी.पश्चिमी सिंहभूम जिला जेएमएम समिति ने कोल्हान के उन वीर योद्धाओं को नजरअंदाज कर अपनी पार्टी के दिसुम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर जिस प्रकार की बयानबाजी एवं हठधर्मिता दिखाई है. जिससे झामुमो का वास्तविक चरित्र उजागर हो गया है. उनके लिए अपनी पार्टी ही सर्वोपरि है. यदि झामुमो जिला अध्यक्ष एवं नेताओं में जरा भी सामाजिक सोच होती, तो बीच का रास्ता निकल कर इस प्रकरण पर आपत्ति कर रहे सामाजिक संगठनों एवं बुद्धिजीवियों के साथ वार्ता समाधान का हिस्सा बनते. सत्ता के अहंकार में इनकी मानसिकता बिगड़ सी गई है जिसे समय रहते ठीक कर लेनी चाहिए. जिलाध्यक्ष सत्ता का भय दिखा कर गुरु जी प्रतिमा जबरन बनवा रहे हैं. किंतु इसके विपरीत संघ संविधान और कानून के दायरे में रहकर हो समाज की अस्मिता, अधिकारों एवं जनभावनाओं की रक्षा के किय संगठित और सदा संघर्षरत रहेगी.
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