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रांची/डेस्क: जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े विवाद मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक न्यास भंग और धमकी जैसे आरोपों के तहत संज्ञान लेने की मांग को लेकर दायर पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दिया गया है. न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा की कोर्ट ने शिकायतकर्ता मनोज वर्मा की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज की. कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है. मामला शिकायतवाद संख्या 9553/2024 से जुड़ा है. शिकायतकर्ता मनोज वर्मा ने दिनानाथ बनर्जी के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की थी. निचली अदालत ने मामले की जांच और गवाहों के बयान के आधार पर केवल धारा 323 (मारपीट), 341 (गलत तरीके से रोकना) और 379 (चोरी) के तहत प्रथम दृष्टया मामला पाते हुए संज्ञान लिया था.
इस आदेश को चुनौती देते हुए मनोज वर्मा ने पुनरीक्षण याचिका दायर कर दावा किया था कि आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी (धारा 420), आपराधिक न्यास भंग (धारा 406), गाली-गलौज (धारा 504) और धमकी (धारा 506) का भी मामला बनता है. सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच साल 2018 में जमीन बिक्री को लेकर समझौता हुआ था. शिकायतकर्ता ने करीब 21 लाख रुपये का भुगतान किया था. लेकिन बाद में न तो बिक्री विलेख निष्पादित हुआ और न ही राशि लौटाई गई. अदालत ने कहा कि यह विवाद मूल रूप से संविदात्मक दायित्व के उल्लंघन से संबंधित है, जिसे आपराधिक मुकदमे का रूप नहीं दिया जा सकता.
हालांकि, अदालत ने माना कि मारपीट, रास्ता रोकने और 10 हजार रुपये छीनने के आरोपों के संबंध में प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है. इसी कारण निचली अदालत द्वारा केवल धारा 323, 341 और 379 के तहत संज्ञान लेना उचित था. अदालत ने कहा कि निचली अदालत के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि या अनियमितता नहीं है. परिणामस्वरूप पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई.
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