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हुसैनाबाद /डेस्क: पलामू मानसून की सुस्त रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. आषाढ़ का महीना बीतने को है, लेकिन क्षेत्र में अब तक पर्याप्त वर्षा नहीं होने से अधिकांश किसानों की धान की बुआई और रोपनी बाधित हैं. किसान आज भी आसमान की ओर टकटकी लगाए अमृत बूंदों की प्रतीक्षा कर रहे हैं. जिससे खरीफ फसलों की खेती समय पर शुरु हो सके.
बारिश नहीं होने के कारण कुछ किसान मोटर पंप के सहारे खेतों की सिंचाई कर धान की नर्सरी तैयार करने एवं आषाढ़ी खेती की शुरुआत कर रहे हैं. हालांकि डीजल और बिजली की बढ़ती लागत के कारण यह व्यवस्था सभी किसानों के लिए संभव नहीं है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों की परेशानी और बढ़ गई है.
वहीं प्रखंड के लोहरपुरा गांव में किसान जयप्रकाश मेहता की छह वर्षीय पुत्री वाणी कुमारी ने परंपरागत रीति रिवाज के अनुसार खेत में इंद्र भगवान का समरण कर आषाढ़ी पूजा कर अच्छी वर्षा और भरपूर फसल की कामना की है. पूजा के बाद मोटर पंप से सिंचाई कर खेती कार्य शुरु किया गया. यह दृश्य ग्रामीण अंचल में खेती और प्रकृति के प्रति किसानों की आस्था तथा मजबूरी, दोनों को दर्शाता है.
किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो धान की रोपनी में देरी होगी, खेती की लागत बढ़ेगी और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहेगी. किसानों ने सरकार से सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था मजबूत करने, सोलर पंप पर अनुदान का लाभ समय पर उपलब्ध कराने तथा सूखे की स्थिति बनने पर आवश्यक राहत और सहायता देने की मांग की है.
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