खुद को दूसरों की नजर में परफेक्ट की दौड़ बन रही तनाव की वजह! सुकून चाहिए तो आज ही बदलें ये 1 सोच

By Mansi Kumari
खुद को दूसरों की नजर में परफेक्ट की दौड़ बन रही तनाव की वजह! सुकून चाहिए तो आज ही बदलें ये 1 सोच

न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क:
आज के दौर में सोशल मीडिया, दिखावे और दूसरों को प्रभावित करने की होड़ ने लोगों की जिंदगी पर गहरा असर डाला हैं. बेहतर जीवन की चाहत अब धीरे-धीरे परफेक्ट दिखने की सनक में बदलती जा रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरों की नजरों में अच्छा बनने की कोशिश कई बार व्यक्ति को मानसिक तनाव, आर्थिक दबाव और आत्म-संतुष्टि की कमी की ओर धकेल देती हैं.

दूसरों को खुश करने की आदत बना रही मानसिक बोझ
आज बड़ी संख्या में लोग अपने फैसले खुद की खुशी के बजाय समाज की राय को ध्यान में रखकर लेते हैं. कौन क्या सोचेगा, लोग क्या कहेंगे, सोशल मीडिया पर कितने लाइक्स मिलेंगे या समाज में हमारी छवि कैसी बनेगी- ये सवाल कई लोगों की जिंदगी को नियंत्रित कर रहे हैं.

मोटिवेशनल स्पीकर संदीप माहेश्वरी भी इस सोच को मानसिक आजादी की सबसे बड़ी बाधा मानते हैं. उनका कहना है कि जब तक इंसान दूसरों को प्रभावित करने के लिए जीता रहेगा तब तक वह अपनी असली पहचान से दूर होता जाएगा.

दिखावे की संस्कृति ने बढ़ाया आर्थिक दबाव
एक्सपर्ट्स के अनुसार, सामाजिक स्वीकृति पाने की चाहत केवल मानसिक ही नहीं बल्कि आर्थिक समस्याएं भी पैदा कर रही हैं. महंगे मोबाइल फोन, लग्जरी गाड़ियां, भव्य शादियां और स्टेटस सिंबल बन चुकी चीजों पर जरुरत से ज्यादा खर्च करना अब आम बात हो गयी हैं. कई लोग सिर्फ समाज में अपनी छवि बनाए रखने के लिए कर्ज तक ले लेते है लेकिन बाद में यही कर्ज ईएमआई के बोझ और मानसिक तनाव का कारण बन जाता हैं. आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि दिखावे पर आधारित खर्च लंबे समय में वित्तीय अस्थिरता को जन्म दे सकता हैं.

सोशल मीडिया ने बढ़ाई तुलना की प्रवृत्ति
डिजिटल युग में लोग अपनी जिंदगी की तुलना दूसरों की ऑनलाइन दुनिया से करने लगे हैं. सोशल मीडिया पर दिखने वाली चमक-दमक और सफलता की तस्वीरें कई बार वास्तविकता से अलग होती है लेकिन लोग उन्हें सच मानकर खुद को कमतर समझने लगते हैं. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, लगातार तुलना करने की आदत आत्मविश्वास को कमजोर कर सकती है और चिंता, अवसाद तथा असंतोष जैसी समस्याओं को बढ़ा सकती हैं.

एक आदत बदलते ही मिल सकता है मानसिक सुकून
विशेषज्ञों का कहना है कि जीवन में वास्तविक खुशी तब मिलती है जब व्यक्ति दूसरों की अपेक्षाओं के बजाय अपने लक्ष्यों और मूल्यों के अनुसार जीना शुरू करता हैं. खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान देना, अपनी आर्थिक क्षमता के भीतर रहना और अनावश्यक तुलना से बचना मानसिक शांति का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता हैं.

खुद की नजरों में सफल बनना है सबसे बड़ी उपलब्धि
जीवन में सच्ची सफलता केवल बाहरी उपलब्धियों से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से तय होती है कि व्यक्ति खुद से कितना संतुष्ट हैं. जब लोग समाज की स्वीकृति के बजाय आत्म-संतुष्टि को प्राथमिकता देना शुरू करते है, तब उनका आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन दोनों मजबूत होते हैं.

 

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