राजेश जायसवाल, महराजगंज: नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा और जलप्रलय के बाद जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। खासकर नेपाल के उत्तरी इलाकों में इस महाविपदा से बड़े पैमाने पर जन-धन की हानि हुई है। आपदा की इस घड़ी में भारत ने एक बार फिर पड़ोसी और मित्र राष्ट्र नेपाल की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। भारत सरकार के साथ-साथ विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाएं एवं सामाजिक संगठन भी पीड़ितों तक राहत पहुंचाने में जुट गए हैं।
रविवार की दोपहर हरिद्वार से पहुंचे स्वयंसेवकों का एक दल दो ट्रकों में राहत सामग्री लेकर भारत-नेपाल के सोनौली सीमा से सड़क मार्ग के जरिए काठमांडू के लिए रवाना हुआ। राहत सामग्री में टेंट, कपड़े, बर्तन, दवाइयां सहित रोजमर्रा की जरूरत की अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। यह सामग्री नेपाल के जलप्रलय प्रभावित क्षेत्रों में पीड़ित परिवारों तक पहुंचाई जाएगी। नेपाल
क्या बोले स्वयंसेवक संघ?
रवाना होने से पहले स्वयंसेवक मंगल सिंह गढ़वाल और दिनेश चंद मैखुरी ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच सिर्फ सांस्कृतिक संबंध ही नहीं, बल्कि रोटी-बेटी और भाईचारे का सदियों पुराना अटूट रिश्ता है। ऐसे में नेपाल में आई इस भयावह प्राकृतिक त्रासदी के समय वहां के लोगों की सहायता करना हम सभी का मानवीय दायित्व है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के इस कहर ने नेपाल के कई परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना और सेवा भाव के साथ स्वयंसेवकों का दल राहत सामग्री लेकर नेपाल रवाना हुआ है, ताकि जरूरतमंदों तक समय पर आवश्यक सहायता पहुंचाई जा सके। सोनौली सीमा से राहत सामग्री रवाना होने के दौरान स्वयंसेवकों में नेपाल के आपदा पीड़ितों तक हरसंभव मदद पहुंचाने का उत्साह और सेवा का भाव दिखाई दिया।