राजेश जायसवाल, महराजगंज: भारत-नेपाल सीमा से सटे नगर पंचायत सोनौली में रामजानकी मंदिर के पास करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर कथित कब्जे की कोशिश का मामला सामने आया है। तहसील के राजस्व नक्शे में पोखरे के रूप में दर्ज जमीन पर पिलर खड़े किए जाने की सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
बताया जा रहा है कि रकबा नंबर 23 में करीब 33 डिसमिल पोखरे की जमीन पर कुछ लोगों द्वारा कब्जे की कोशिश की जा रही थी। मौके पर पिलर तक खड़े कर दिए गए थे। इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को मिलने के बाद नायब तहसीलदार और नगर पंचायत सोनौली के अधिशासी अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी की मदद से पिलरों और किए गए अतिक्रमण को हटवा दिया।
सूत्रों के अनुसार, इस जमीन पर कब्जे को लेकर करीब एक करोड़ रुपये में सौदा तय होने की चर्चा भी सामने आई है। यह भी आरोप है कि कब्जे के पीछे सक्रिय लोगों को कुछ विभागीय कर्मचारियों का संरक्षण प्राप्त है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सोनौली जैसे सीमावर्ती क्षेत्र में सरकारी और सार्वजनिक उपयोग की जमीनों पर लगातार नजरें गड़ाए जाने से प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों का यह भी दावा है कि कब्जे की कोशिश में शामिल एक व्यक्ति ने कम समय में कपड़े के कारोबार के जरिए करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की है। इस दावे की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं, पोखरे की जमीन के समीप स्थित एक बड़े नाले पर भी कई लोगों द्वारा कथित रूप से अतिक्रमण किए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर पोखरे की जमीन से कब्जा हटवाया है तो कब्जे का प्रयास करने वालों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई? स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की राजस्व अभिलेखों के आधार पर जांच कराकर सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने और कब्जे के प्रयास में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। अब देखना यह है कि प्रशासन केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित रहता है या कब्जे के प्रयास के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई करता है।