बृजेश मिश्रा, भादर (अमेठी): देश की रक्षा करते हुए जान गंवाने वाले शहीद शिव कुमार मिश्र के गांव की बदहाल सड़क का मुद्दा उठते ही प्रशासन हरकत में आ गया। वर्षों से पक्की सड़क की राह देख रहे ग्रामीणों ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को अपनी पीड़ा बताई तो बुधवार शाम ही जिलाधिकारी शशांक चौधरी ने संबंधित मार्ग का सर्वे करा दिया। अब ग्रामीणों को सड़क निर्माण शुरू होने का इंतजार है।
शहीद के गांव तक पहुंचना बना चुनौती
भादर ब्लॉक के भोजपुर गांव निवासी शिव कुमार मिश्र सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में तैनात थे। जम्मू में ड्यूटी के दौरान 11 अक्टूबर की रात उनका निधन हो गया था। शहीद के परिजनों से मुलाकात करने अमेठी पहुंचीं स्मृति ईरानी के सामने ग्रामीणों ने गांव तक जाने वाले बदहाल रास्ते की समस्या उठाई। ग्रामीणों ने पीपरपुर से भोजपुर होते हुए गोपालपुर माइनर तक जाने वाले मार्ग को पक्का कराने की मांग की।
गड्ढों से भरी सड़क, ग्रामीण बेहाल
ग्रामीणों के मुताबिक, यह मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे होने से लोगों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ती है। भोजपुर के साथ आसपास के गांवों के लोग भी इस समस्या से प्रभावित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क के कारण रोजमर्रा के कामों के लिए आने-जाने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने स्मृति ईरानी को पत्र सौंपकर सड़क निर्माण की मांग रखी। उनका कहना था कि शहीद के गांव तक बेहतर आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इस मार्ग का पक्का होना जरूरी है।
स्मृति ईरानी के सामने उठा मुद्दा, शाम को ही सर्वे
ग्रामीणों की मांग सामने आने के बाद प्रशासन ने पहल की। बुधवार शाम जिलाधिकारी शशांक चौधरी ने संबंधित मार्ग का सर्वे कराया। डीएम ने भरोसा दिलाया कि सड़क निर्माण का काम जल्द शुरू कराया जाएगा। इस कार्रवाई से ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान अब दूर नहीं है।
सर्वे के बाद अब निर्माण का इंतजार
सड़क का सर्वे होने के बाद ग्रामीणों की निगाहें निर्माण कार्य शुरू होने पर टिकी हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि काम जल्द शुरू हो और तय समय में पूरा कराया जाए, ताकि भोजपुर गांव तक पहुंचने का रास्ता सुगम हो सके। इससे आसपास के गांवों के लोगों को भी राहत मिलेगी। अब देखना होगा कि प्रशासन का आश्वासन कितनी जल्दी जमीन पर उतरता है और शहीद के गांव तक पक्की सड़क पहुंचने का सपना कब साकार होता है।