भितरवार के पूर्व विधायक बृजेन्द्र तिवारी का 75 वर्ष की उम्र में गुरुवार शाम निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और उपचार के दौरान अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से ग्वालियर और भितरवार क्षेत्र की राजनीति में शोक का माहौल है।
बता दें कि 75 वर्षीय बृजेन्द्र तिवारी का राजनीतिक जीवन छात्र आंदोलनों से शुरू होकर विधानसभा तक पहुंचा। समाजवादी विचारधारा से निकले तिवारी ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में अलग पहचान बनाई। बाद के वर्षों में उन्होंने भाजपा का साथ छोड़ा और कांग्रेस में शामिल हो गए।
छात्र राजनीति से मिली पहचान
बृजेन्द्र तिवारी को जीवाजी विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति का प्रभावशाली चेहरा माना जाता था। वह विश्वविद्यालय छात्रसंघ के संयोजक भी रहे। उस दौर में उनके निवास पर बड़ी संख्या में छात्र और युवा नेताओं का आना-जाना रहता था। छात्र नेतृत्व के बीच उनकी मजबूत पकड़ ने उन्हें प्रदेश की सक्रिय राजनीति तक पहुंचाया।
समाजवादी आंदोलन से गहरा जुड़ाव
बृजेन्द्र तिवारी का जुड़ाव समाजवादी आंदोलन से रहा। उन्हें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व रेल मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस सहित कई समाजवादी नेताओं का करीबी सहयोगी माना जाता था। सार्वजनिक जीवन में उन्होंने लंबे समय तक समाजवादी राजनीति की विचारधारा के साथ काम किया।
पारिवारिक विरासत और राजनीतिक सफर
बृजेन्द्र तिवारी ऐसे राजनीतिक परिवार से आते थे जिसकी क्षेत्र में पहले से पहचान थी। उनके पिता विष्णूदत्त तिवारी भी जनता पार्टी के दौर में विधायक रहे थे। इसी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए बृजेन्द्र तिवारी ने विधानसभा तक का सफर तय किया। बाद में उन्होंने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा, हालांकि उनकी पहचान दलगत राजनीति से अधिक एक सक्रिय जननेता और छात्र नेता के रूप में बनी रही।
राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक
बृजेन्द्र तिवारी के निधन की खबर सामने आने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों ने शोक व्यक्त किया। छात्र राजनीति से लेकर मुख्यधारा की राजनीति तक उनके साथ काम कर चुके लोगों ने उन्हें एक सहज, सक्रिय और वैचारिक राजनीति करने वाले नेता के रूप में याद किया।