धार। इंदौर-दाहोद रेल लाइन पर धार तक ट्रेन पहुंचने की राह की सबसे बड़ी अड़चन अब खत्म होने की कगार पर है। करीब 3 किलोमीटर लंबी टीही टनल का काम आखिरी दौर में पहुंच गया है। 2957 मीटर लंबी इस टनल में अब सिर्फ करीब 200 मीटर हिस्से में बैलास्टलेस ट्रैक बिछाना बाकी है। रेलवे ने काम दो शिफ्ट में चला रखा है।
रोज 50 से 55 मीटर बिछ रहा ट्रैक
रेलवे ट्रैक का काम देख रहे अफसरों के अनुसार, बचे हुए हिस्से में रोजाना औसतन 50 से 55 मीटर ट्रैक बिछाया जा रहा है। यही रफ्तार बनी रही तो 200 मीटर का काम कुछ ही दिनों में निपट सकता है। टनल के भीतर बिजली लाइन यानी इलेक्ट्रिफिकेशन और दूसरे जरूरी काम भी साथ चल रहे हैं। रेलवे ने करीब 25 दिन में टनल समेत बचे हुए सभी काम पूरे करने का लक्ष्य रखा है।
पानी, ठेका और कोरोना ने रोकी थी रफ्तार
यह टनल बरसों से अलग-अलग वजहों से अटकती रही है। निर्माण के दौरान टनल में पानी भर गया था। फिर ठेका खत्म होने से काम प्रभावित हुआ। कोरोना काल में भी निर्माण गतिविधियाँ थम सी गईं। अब रेलवे ने इस हिस्से को प्राथमिकता में रखकर काम को अंजाम तक पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है।
टनल के दोनों छोर पर भी चल रहा काम
टीही और पीथमपुर की तरफ टनल के पास मुख्य रेल लाइन से ट्रैक जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। टनल तैयार होते ही यह लान पीथमपुर, सागौर और गुणावद होते हुए धार तक पहुंचेगी। इस पूरे रूट की यह सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है। रेलवे के अनुसार पीथमपुर, सागौर, गुणावद और धार स्टेशन भवन बनकर तैयार हैं। कुछ फिनिशिंग का काम बाकी है। सिग्नलिंग का करीब 97 फीसदी काम पूरा हो चुका है। साथ ही बचा हुआ काम इंटरलॉकिंग के दौरान निपटाया जाएगा।
अब सीआरएस निरीक्षण का इंतजार
टनल का काम पूरा होने के बाद अगला पड़ाव कमिश्नर रेलवे सेफ्टी यानी सीआरएस का निरीक्षण होगा। निरीक्षण और जरूरी मंजूरी मिलने के बाद ही धार तक ट्रैक चलाने की आगे की औपचारिकताएं पूरी हो सकेंगी। रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, टीही टनल में दो पालियों में काम लगातार जारी है और निर्माण अंतिम चरण में है।