BJP MLA Umakant Sharma: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की सिरोंज विधानसभा सीट से भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने एक नई चर्चा छेड़ दी है। विधायक उमाकांत शर्मा ने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए सनातन धर्म को मानने वाले परिवारों से अपने बच्चों को क्रिश्चियन कॉन्वेंट परंपरा के स्कूलों से निकालने की अपील की है। दूसरी ओर, इसी क्षेत्र में छात्रों की कमी का हवाला देते हुए 11 मदरसों के संचालकों द्वारा संस्थान बंद करने का आवेदन दिए जाने की बात भी सामने आई है।
फेसबुक पोस्ट में क्या?
सिरोंज विधायक उमाकांत शर्मा ने अपने आधिकारिक फेसबुक हैंडल पर लिखा है कि "सच्चे सनातनी बंधु माता और बहन को अपने बच्चे क्रिश्चियन कॉन्वेंट परंपरा के विद्यालयों से तत्काल हटा लेना चाहिए। साथ ही यदि किसी मुस्लिम मदरसे में पढ़ रहे हो, तो वहां से भी हटा लेना चाहिए। इसी में समाज का हित है।"
11 मदरसों को बंद करने का आवेदन
विधायक के बयान के बीच विदिशा जिले के सिरोंज से एक और खबर सामने आई है। जनशिक्षा केंद्र सिरोंज ने जिला शिक्षा केंद्र को पत्र भेजकर 11 मदरसों को बंद दर्ज करने का अनुरोध किया है। विभागीय दस्तावेज़ों के अनुसार, इन मदरसों के संचालकों ने स्वयं विद्यार्थियों की संख्या में आई कमी के कारण संस्थानों को बंद करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को आवेदन सौंपा था। पत्र में सभी 11 मदरसों के नाम और उनके यूडाइज कोड शामिल हैं, जिन्हें एजुकेशन पोर्टल 3.0 और यूडाइज पोर्टल पर आधिकारिक रूप से बंद दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
प्रियंक कानूनगो का दावा
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस विभागीय पत्र को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए इसे शिक्षा के अधिकार के क्रियान्वयन से जोड़ा है। प्रियंक कानूनगो ने लिखा कि विदिशा जिले में प्रशासन द्वारा चलाए गए जागरूकता अभियान और आरटीई नियमों के पालन के चलते बच्चों का सामान्य स्कूलों में दाखिला हुआ, जिससे मदरसों में दर्ज छात्र संख्या कम हुई और वे खाली हो गए। कानूनगो ने दावा किया कि पूर्व में कुछ मदरसों में हिंदू बच्चों के दर्ज होने के मामले भी सामने आए थे। उन्होंने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की इस पहल की सराहना की। हालांकि, साझा किए गए विभागीय पत्र में केवल संचालकों द्वारा दिए गए आवेदनों का ही उल्लेख है, अलग-अलग मदरसों का विस्तृत ब्योरा नहीं है।