Navratri 2026 Muhurat

Navratri 2026 Muhurat: वैधृति योग के शुभ संयोग में 11 अक्टूबर से गूंजेगा मां दुर्गा का जयकारा

आश्विन शुक्ल पक्ष की शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ इस बार 11 अक्टूबर, रविवार से वैधृति योग के शुभ संयोग में होगा। नवरात्रि को लेकर देवलोक कॉलोनी स्थित श्री ज्योतिष कार्यालय में...

By : विकास जैन
Navratri 2026 Muhurat: वैधृति योग के शुभ संयोग में 11 अक्टूबर से गूंजेगा मां दुर्गा का जयकारा

Navratri 2026 Muhurat: वैधृति योग के शुभ संयोग में 11 अक्टूबर से गूंजेगा मां दुर्गा का जयकारा

प्रमोद शर्मा, हापुड़: आश्विन शुक्ल पक्ष की शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ इस बार 11 अक्टूबर, रविवार से वैधृति योग के शुभ संयोग में होगा। नवरात्रि को लेकर देवलोक कॉलोनी स्थित श्री ज्योतिष कार्यालय में ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय की अध्यक्षता में विद्वान ज्योतिषाचार्यों की महासभा आयोजित हुई। बैठक में ज्योतिषशास्त्र एवं वैदिक पंचांग की गणना के आधार पर नवरात्रि पर्व और कलश स्थापना के मुहूर्त को लेकर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।

ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय ने बताया कि प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:20 बजे से प्रारंभ होकर 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी। 11 अक्टूबर को चित्रा नक्षत्र रात 10:32 बजे तक तथा वैधृति योग रात 9:04 बजे तक रहेगा। विद्वानों के अनुसार प्रतिपदा के दिन चित्रा नक्षत्र अथवा वैधृति योग में से कोई भी पूरे दिन व्याप्त हो तो अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करना शुभ माना जाता है।

पंडित प्रेम प्रकाश मिश्रा ने बताया कि उदया तिथि के अनुसार 11 अक्टूबर को प्रातः 11:45 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना का विशेष शुभ समय रहेगा। वहीं, पंडित सुरेंद्र द्विवेदी ने बताया कि आवश्यकता पड़ने पर प्रातः 10:04 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक लाभ-अमृत चौघड़िया में भी कलश स्थापना की जा सकती है।

पंडित प्रवीण तिवारी के अनुसार धनु द्विस्वभाव लग्न प्रातः 11:32 बजे से दोपहर 1:36 बजे तक रहेगा। जबकि पंडित राज तिवारी ने श्रद्धालुओं को सावधान करते हुए बताया कि शाम 4:30 से 6 बजे तक राहुकाल रहेगा, इसलिए इस अवधि में कलश स्थापना नहीं करनी चाहिए।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार रविवार को प्रथम नवरात्रि पड़ने के कारण इस बार माता का वाहन हाथी माना गया है। पंडित रचित अवस्थी ने बताया कि माता का वाहन हाथी होने का संबंध अधिक वर्षा से जोड़ा जाता है। वहीं, 20 अक्टूबर मंगलवार को विजयादशमी होने के कारण माता का प्रस्थान चरणायुध अर्थात मुर्गा वाहन से माना गया है। पंडित हर्ष पाण्डेय और पंडित सचिन पाण्डेय के अनुसार मुर्गा वाहन से माता के प्रस्थान को दुःख-कष्ट में वृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।

प्रथम नवरात्रि में मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। पंडित मनुज मिश्रा ने बताया कि आरोग्य एवं धन लाभ की कामना से मां शैलपुत्री को गाय के घी का भोग लगाना शुभ माना गया है। महासभा में पंडित प्रेम प्रकाश मिश्रा, ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय, पंडित सुरेंद्र द्विवेदी, पंडित प्रवीण तिवारी, पंडित राज तिवारी, पंडित हर्ष पाण्डेय, पंडित रचित अवस्थी, पंडित धीरज पाण्डेय, पंडित सचिन पाण्डेय, पंडित मनुज मिश्रा सहित अनेक विद्वान उपस्थित रहे।

संबंधित सामग्री

Hapur News: प्रसाद की पकौड़ी पर बवाल, कांवड़ कैंप बना रणक्षेत्र, शिव भक्त को भगाने का आरोप

Hapur News: प्रसाद की पकौड़ी पर बवाल, कांवड़ कैंप बना रणक्षेत्र, शिव भक्त को भगाने का आरोप

कचहरी परिसर के बाहर शिव भक्तों की सेवा के लिए लगाए गए कांवड़ कैंप में प्रसाद की पकौड़ियों को लेकर ऐसा विवाद छिड़ा कि देखते ही देखते सेवा का स्थान रणक्षेत्र में तब्दील हो गया।

Aug 10, 2026