रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित दिव्यांग कल्याण घोटाले में सीबीआई की जांच अब अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ती दिख रही है। एसआरसी और पीआरआरसी से जुड़े इस मामले में करीब एक हजार करोड़ रुपये की संभावित गड़बड़ी के आरोप लगे थे। केंद्रीय जांच एजेंसी इसी महीने आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी में है। फिलहाल दस्तावेजों की पड़ताल, पूछताछ और सबूत जुटाने का काम चल रहा है।
कई पुराने और सीनियर आईएएस अफसरों के नाम
इस मामले से जुड़ी याचिका में कई पूर्व और सीनियर आईएएस अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इनमें पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांढ और सुनील कुजूर के साथ डॉ आलोक शुक्ला, एमके राउत और बीएल अग्रवाल प्रमुख हैं। इसके अलावा सतीश पांडेय, पीपी सोती, राजेश तिवारी, अशोक तिवारी और तत्तकालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री रेणुका सिंह का संदर्भ भी सामने आय़ा है।
हजार करोड़ के आरोप की जांच में करोड़ों खर्च
एजेंसियों की शुरुआती जांच में करीब एक हजार करोड़ रुपये की अनियमितता की बात सामने आई थी। आरोप था कि दिव्यांगों के पुनर्वास के लिए चलने वाली संस्थाओं एसआरसी और पीआरआरसी में कागजों पर कर्मचारियों की नियुक्ति दिखाकर वेत निकाला गया। कुछ मामलों में सरकारी कर्मचारियों के नाम पर नगद भुगतान और वित्तीय गड़बड़ियों के भी आरोप लगे।
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई की अब तक की जांच में दोनों संस्थाओं का असली खर्च सिर्फ 35 से 40 करोड़ रुपये के आसपास मिला है। जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।
हाई कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई को मिली थी जांच
साल 2020 में हाई कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने जांच शुरू की थी। अदालत को आशंका थी कि बड़े पदों पर रहे प्रभावशाली अफसरों के नाम आने से स्थानीय स्तर की जांच प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से मामला केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपा गया।
अफसरों में घिरे कई अफसर पहले से दूसरे मामलों में चर्चा में
जांच के दायरे में आए कई अधिकारियों के नाम पहले भी अन्य बड़े मामलों में आ चुके हैं। विवेक ढांढ का नाम शराब घोटाले में आया था। डॉ आलोक शुक्ला का नाम नान घोटाले में सामने आया। बीएल अग्रवाल का नाम शेयर और फर्जी बैंक खाता घोटाले, आये से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में आ चुका है। सुनील कुजूर और एमके राउत भी दूसरे मामलों की जांच का सामना कर चुके हैं।