अमित चौहान, रायपुर। छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर ‘मातृशक्ति’ अब केवल आदर का प्रतीक नहीं, बल्कि अब सुशासन और प्रशासनिक तंत्र की मुख्य धुरी बन चुकी हैं. छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक ढांचे में एक नया दौर देखने को मिल रहा है. हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल के बाद यह साफ हो गया है कि प्रदेश में महिलाओं की भूमिका केवल नीतियों तक सीमित नहीं, बल्कि योजनाओं को जमीन पर उतारने की कमान भी उन्हीं के हाथों में है. राज्य के 33 जिलों में से 12 जिलों की कमान अब महिला आईएएस अधिकारियों के हाथों में है।
महिला अधिकारियों को कलेक्टर जैसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण पदों की जिम्मेदारी सौंपना प्रशासनिक क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। यह बदलाव इस बात का भी संकेत है कि प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपते समय अधिकारियों की क्षमता, अनुभव, कार्यकुशलता और नेतृत्व क्षमता को प्राथमिकता दी जा रही है।
12 जिलों में महिला कलेक्टर
वर्तमान में प्रदेश के 12 जिलों में महिला IAS अधिकारी कलेक्टर के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इनमें कोंडागांव की कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना, बेमेतरा की प्रतिष्ठा ममगई, नारायणपुर की नम्रता जैन, बालोद की दिव्या मिश्रा, सूरजपुर की रेना जमील, सक्ती की जयश्री जैन, कबीरधाम की तुलिका प्रजापति और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की तनुजा सलाम शामिल हैं। इसी तरह सारंगढ़-बिलाईगढ़ में पद्मिनी भोई साहू, बलरामपुर-रामानुजगंज में चंदन संजय त्रिपाठी, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में संतंन देवी जांगड़े और कोरिया में रोक्तिमा यादव जिला प्रशासन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
नेतृत्व में बढ़ती भागीदारी
जिला प्रशासन में महिलाओं की यह भागीदारी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश में बदलती प्रशासनिक कार्यसंस्कृति की तस्वीर भी प्रस्तुत करती है। कलेक्टर के रूप में महिला अधिकारियों को कानून-व्यवस्था, विकास योजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण, ग्रामीण विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण निर्णय लेने होते हैं।
युवा महिलाओं के लिए भी प्रेरणादायक संदेश
प्रदेश के 12 जिलों में महिला IAS अधिकारियों की मौजूदगी से प्रशासनिक व्यवस्था में महिला नेतृत्व को मजबूती मिली है। इसके साथ ही युवा महिलाओं के लिए भी प्रेरणादायक संदेश जा रहा है। यह बदलाव बताता है कि महिलाएं प्रशासनिक क्षेत्र में जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ विकास की दिशा तय करने में भी प्रभावी भूमिका निभा रही हैं।
नारी सशक्तिकरण की मिसाल
सरकार की ओर से महिलाओं को महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व दिया जाना नारी शक्ति पर विश्वास और समान अवसर की भावना को मजबूत करता है। छत्तीसगढ़ में 12 जिलों की कमान महिला IAS अधिकारियों के हाथों में होना प्रदेश के लिए महिला नेतृत्व और सशक्तिकरण की एक सकारात्मक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।