प्रमोद शर्मा, हापुड़: बेटियों को सिर्फ सपने देखने नहीं, बल्कि जिम्मेदारी संभालने का अवसर भी मिलना चाहिए। इसी सोच को जमीन पर उतारते हुए मिशन शक्ति अभियान फेज-6 के तहत कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की कक्षा-7 की छात्रा निधि को एक दिन की सांकेतिक जिलाधिकारी बनाया गया। कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी की भूमिका निभाते हुए निधि ने जनसुनवाई की और महिलाओं से जुड़ी शिकायतों को सुना। इस पहल ने बालिकाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की समझ विकसित करने का संदेश दिया।
कलेक्ट्रेट में दिखा बालिका नेतृत्व का आत्मविश्वास
जिलाधिकारी कविता मीना की अध्यक्षता में आयोजित इस पहल के दौरान छात्रा निधि ने आमजन की समस्याओं और महिलाओं से संबंधित शिकायतों को सुना। साथ ही मिशन शक्ति के अंतर्गत संचालित महिला सुरक्षा एवं जागरूकता कार्यक्रमों की समीक्षा भी की। कक्षा-7 की छात्रा को प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाते देख यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि अवसर मिलने पर बेटियां भी नेतृत्व की भूमिका प्रभावी ढंग से निभा सकती हैं।
बालिकाओं की सुरक्षा और सुविधाओं पर जोर
एक दिन की सांकेतिक जिलाधिकारी निधि ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में छात्राओं की सुरक्षा, शिक्षा और उपलब्ध सुविधाओं से जुड़े विषयों पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं को प्रशासनिक व्यवस्था से परिचित कराने के साथ उनकी समस्याओं और जरूरतों को समझने का अवसर देना भी रहा।
‘बेटियां किसी से कम नहीं’
इस अवसर पर जिलाधिकारी कविता मीना ने कहा कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं। कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में पढ़ने वाली बेटियां आत्मनिर्भर बनकर देश का भविष्य बनेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि निधि जैसी प्रतिभाशाली छात्राएं आगे चलकर पूरे जनपद का नाम रोशन करेंगी।
जिलाधिकारी ने छात्रा निधि को प्रशस्ति पत्र और उपहार देकर सम्मानित किया तथा उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मिशन शक्ति फेज-6 के तहत की गई यह पहल बालिकाओं को सम्मान, आत्मविश्वास और नेतृत्व का अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश प्रस्तुत करती नजर आई।