दतिया। मध्य प्रदेश की शक्तिपीठ वाले शहर दतिया में अभिवादन 'सुप्रभात' नहीं, बल्कि "जय माई की" से होता है। मां पीतांबरा की आराधना यहां की दिनचर्या का हिस्सा है। बाजारों, मोहल्लों और घरों में राजनीति से पहले आस्था की गूंज सुनाई देती है। यही वजह है कि विधानसभा उपचुनाव में भी धार्मिक आस्था और राजनीतिक रणनीति साथ-साथ चलती नजर आई। अब 71.44 प्रतिशत मतदान के बाद शहर की निगाहें 3 अगस्त को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं।
सदियों पुराने पीतांबरा पीठ को देश के प्रमुख तांत्रिक पीठों में माना जाता है। यहां रोजाना श्रद्धालुओं के साथ राजनीतिक नेता, उद्योगपति और अन्य प्रमुख हस्तियां भी पहुंचती हैं। स्थानीय व्यापारी और सामाजिक कार्यकर्ता पी. काले कहते हैं कि उनका दिन मां पीतांबरा के दर्शन के बिना शुरू नहीं होता। उनके मुताबिक, "मां से ही पूरे दिन काम करने की ऊर्जा मिलती है।"
श्रद्धालुओं ने नहीं लिया उम्मीदवार का नाम
मतदान से पहले चुनावी हलचल के बीच मंदिर परिसर में भी लोगों से चुनाव की चर्चा हुई, लेकिन अधिकांश श्रद्धालुओं ने किसी उम्मीदवार का नाम लेने से परहेज किया। एक ही जवाब बार-बार सुनाई दिया-"माई तय करेंगी कि जीत का ताज किसके सिर होगा।" यह जवाब दतिया के उस माहौल को दिखाता है, जहां लोग अपनी राजनीतिक पसंद सार्वजनिक करने से बचते रहे।
पीतांबरा पीठ के आसपास फूल बेचने वाले दुकानदारों का रुख भी कुछ ऐसा ही था। बातचीत में उन्होंने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का जरूर जिक्र किया। उनका कहना था कि जब "दादा" मंदिर आते थे तो उनके समर्थकों के कारण फूलों की बिक्री बढ़ जाती थी। इस बार टिकट नहीं मिलने के कारण स्थानीय माहौल बदला हुआ नजर आया, लेकिन खुलकर कोई राजनीतिक राय देने से अधिकांश लोग बचते रहे।
बीजेपी और कांग्रेस ने बदले प्रत्याशी
भाजपा ने इस उपचुनाव में डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। टिकट घोषित होने के बाद कुछ जगहों पर विरोध भी हुआ। लेकिन बाद में पार्टी नेतृत्व के हस्तक्षेप से स्थिति सामान्य हो गई। इसके बावजूद डॉ. मिश्रा पूरे चुनाव में पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में सक्रिय रहे। दूसरी ओर कांग्रेस ने कुंवर घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, अजय सिंह समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव प्रचार किया। चुनाव लड़ने के अयोग्य होने के बावजूद पूर्व विधायक राजेंद्र भारती भी कांग्रेस के प्रचार अभियान का अहम चेहरा बने रहे।
नेताओं के प्रचार तक सीमित नहीं रहा चुनाव
दतिया का चुनाव सिर्फ नेताओं के प्रचार तक सीमित नहीं रहा। बुंदेलखंड के इस क्षेत्र में ओबीसी, अनुसूचित जाति और सवर्ण मतदाताओं का सामाजिक समीकरण चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहा। वहीं, शहर में सड़क, मेडिकल कॉलेज, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य विकास कार्य भी चुनावी चर्चा के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे। कई स्थानीय लोग इन विकास कार्यों का श्रेय डॉ. नरोत्तम मिश्रा को देते हैं। चुनाव के दौरान सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गए। झांसी और भिंड से लगने वाली सीमाओं पर विशेष निगरानी रखी गई, ताकि मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
देशभर में तीन सीट के उपचुनाव में सबसे अधिक मतदान
मतदान पूरा होने के बाद दतिया में 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो हाल के विधानसभा उपचुनावों में उल्लेखनीय माना जा रहा है। पुरुषों का मतदान 74.09 प्रतिशत, महिलाओं का 68.48 प्रतिशत और तीसरे लिंग के मतदाताओं का 20 प्रतिशत रहा। 2.20 लाख से अधिक मतदाताओं के लिए 291 मतदान केंद्र बनाए गए थे। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोटों से हराया था। इस बार उपचुनाव में भाजपा के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के कुंवर घनश्याम सिंह के बीच सीधा मुकाबला है।
अब मतदान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और फैसला ईवीएम में बंद है। दतिया में एक बार फिर वही भरोसा सुनाई दे रहा है-"माई तय करेंगी कि जीत का ताज किसके सिर सजेगा।" अब सबकी नजर 3 अगस्त को आने वाले नतीजों पर है।