राजेंद्र जैन"रिंकू", शिवपुरी: शिवपुरी शहर की सड़कों पर यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं। जिन मार्गों पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है, उन्हीं नो-एंट्री जोन में भारी वाहन बेरोकटोक दौड़ते नजर आ रहे हैं। इन वाहनों की आवाजाही से न केवल यातायात व्यवस्था चरमरा रही है, बल्कि आम नागरिकों की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है।
हो चुकी है दो युवाओं की मौत
सबसे चिंताजनक बात यह है कि शहर में भारी वाहनों से हुए दर्दनाक हादसों में दो युवाओं की जान जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ऐसा स्थायी इंतजाम नहीं किया, जिससे इस खतरे पर प्रभावी अंकुश लग सके। पूर्व में होटल तरुण रेजीडेंसी के पास डंपर की चपेट में आकर अथर्व उर्फ कान्हा शर्मा और पंकज उर्फ चीनू शर्मा की दर्दनाक मौत आज भी शहर के लोगों के जेहन में है। इस हादसे ने भारी वाहनों की आवाजाही और यातायात प्रबंधन की खामियों को उजागर कर दिया था।
जागी थी उम्मीद, लेकिन चेते नही जिम्मेदार
उस समय उम्मीद जगी थी कि प्रशासन और यातायात पुलिस इस घटना से सबक लेकर सख्त कदम उठाएंगे, लेकिन हालात बता रहे हैं कि दो युवाओं की मौत के बाद भी शिवपुरी में पटरी से उतरी यातायात व्यवस्था में कोई सुधार आता दिखाई नहीं दे रहा। सवाल यह है कि आखिर दो परिवारों के चिराग बुझने के बाद भी जिम्मेदारों की नींद क्यों नहीं टूट रही और आज भी भारी वाहन नो एंट्री में फर्राटा भरते हुए देखे जा सकते हैं, यह स्थिति उस समय है जबकि पुलिस अधीक्षक यांगचैन डोलकर भूटिया ने यातायात महकमे को स्पष्टतौर पर निर्देश दिए है कि किसी भी सूरत में शहर के भीतर नो एंट्री क्षेत्र में भारी वाहन नहीं आने चाहिए।
नो-एंट्री सिर्फ कागजों में
शहर में नो-एंट्री व्यवस्था का उद्देश्य ही यह है कि व्यस्त और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भारी वाहनों की आवाजाही नियंत्रित रहे। इसके बावजूद प्रतिबंधित क्षेत्रों में भारी वाहनों का पहुंचना व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि नो-एंट्री लागू है तो इन वाहनों को प्रवेश कैसे मिल रहा है? क्या नियमित चेकिंग नहीं होती या फिर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई का डर खत्म हो चुका है?
दो मौतें हुईं, लेकिन व्यवस्था नहीं बदली!
अथर्व और पंकज की मौत महज एक सड़क हादसा नहीं थी, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी थी। दो परिवारों ने अपने युवा सदस्यों को खोया। इसके बाद भी यदि भारी वाहन प्रतिबंधित क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं तो यह केवल यातायात नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। हादसे के बाद जिम्मेदारों ने कितनी समीक्षा की, क्या नए सुरक्षा इंतजाम किए और क्या नो-एंट्री व्यवस्था की नियमित निगरानी शुरू हुई, इन सवालों के जवाब पुलिस के आलाधिकारियों के पास भी नहीं हैं।
माधव चौक पर जाम, हर प्रमुख मार्ग पर अव्यवस्था
शहर के सबसे व्यस्त माधव चौक पर जाम की समस्या किसी से छिपी नहीं है। चारों ओर से आने वाले वाहनों का दबाव, बेतरतीब पार्किंग और यातायात प्रबंधन की कमजोरियां आम लोगों को रोज परेशान करती हैं। ऐसे में यदि भारी वाहन भी प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करेंगे तो स्थिति और खतरनाक होना स्वाभाविक है। सवाल यह है कि यातायात पुलिस की प्राथमिकता केवल चालानी कार्रवाई है या शहर को सुरक्षित और सुचारू यातायात व्यवस्था देना भी उसकी जिम्मेदारी है?
जिम्मेदार अधिकारियों से सीधे सवाल
नो-एंट्री जोन में भारी वाहन प्रवेश कैसे कर रहे हैं?
प्रतिबंधित मार्गों पर नियमित निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है और जिम्मेदार नियमों का पालन क्यों नहीं करा पा रहे हैं।
नो एंट्री क्षेत्र में घुसे डम्फर की चपेट में आने से पूर्व में हुई दो युवाओं की मौत के बाद यातायात व्यवस्था में ठोस बदलाव क्यों नहीं किए गए।
अब कार्रवाई नहीं हुई तो अगला हादसा किसके घर का चिराग बुझाएगा?
क्या पुलिस प्रशासन और किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
क्या कहते है अधिकारी?
शिवपुरी एसडीओपी सचिन धुर्वे का कहना है कि अगर नोएंट्री क्षेत्र से भारी वाहन निकल रहे हैं तो यह गलत है, आपके द्वारा बताया गया है में जानकारी लेता हूं कार्रवाई की जाएगी।