भोपाल। मध्य प्रदेश में इस साल किसानों से 45 लाख टन धान खरीदने की योजना बनाई गई है। इसके लिए पंजीयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। किसानों के लिए यह प्रक्रिया 15 अक्टूबर तक चलेगी। इसके बाद 1 नवंबर से धान का उपार्जन शुरू हो सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार बिना फार्मर आईडी के किसी भी किसान से धान नहीं खरीदी जाएगी। सरकार ने यह कड़ा कदम गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के मकसद से उठाया है।
पिछली गड़बड़ियों के बाद उठाया गया कदम
दरअसल, पिछली बार राजगढ़, भिंड और मुरैना जैसे कई जिलों से शिकायतें आई थीं कि कुछ ऑपरेटरों ने किसानों के पंजीयन में ऐसे खसरे भी जोड़ दिए, जो असल में उनके थे ही नहीं। इससे फर्जीवाड़े की आशंका बढ़ गई थी। इसी को रोकने के लिए अब पंजीयन के दौरान फार्मर आईडी को अनिवार्य कर दिया गया है। ताकि कोई भी गलत तरीके से किसी और के खसरे को अपने नाम पर न जोड़ सके।
आधार से जुड़ी फार्मर आईडी बनेगी सुरक्षा कवच
प्रदेश में लंबे समये से यह शिकायत आती रही है कि जिन किसानों ने वास्तव में धान या गेंहू बोया ही नहीं, उनके नाम पर भी खबरे पंजीयन में जोड़ दिए गए और फसल बिकवा दी गई। चूंकि फार्मर आईडी में किसान के खसरे की पूरी जानकारी दर्ज रहती है और यह सीधे आधार से जुड़ी होती है। इसलिए अब ऑपरेटर अपनी मर्जी से किसी का खसरा पंजीयन में शामिल नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा हर किसान के रकबे का शत-प्रतिशत सत्यापन कराना भी अनिवार्य किया जा रहा है।
बटाईदार और सिकमी किसानों तक बढ़ा दायरा
पहले यह व्यवस्था सिर्फ उन मामलों में जरूरी था जहां खातेदार अलग-अलग होते थे या बटाईदार , सिकमी और वनभूमि पर खेती करने वाले किसानों के लिए यह अनिवार्य थी। अब सरकार ने इस नियम का दायरा और बढ़ा दिया है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार, प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 13 लाख 53 हजार 326 फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं।