जन्माष्टमी पर गौरक्षा संकल्प

जन्माष्टमी पर 'गौमाता' के दूध से करें 'गोपाल' का अभिषेक

जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में गौमय उत्पादों का प्रयोग बढ़ाने की दिशा में जोर देने का संकल्प लिया गया है।

By : नरेंद्र कुमार
जन्माष्टमी पर 'गौमाता' के दूध से करें 'गोपाल' का अभिषेक

मथुरा। गाय का पूजन और गाय की सेवा करने से भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की पूर्णता होती है। भगवान श्रीकृष्ण और गौवंश का संबंध अविभाज्य है। जहां गाय हैं, वहीं श्रीकृष्ण हैं। गीता की स्तुति में कहा गया है—‘सर्वोपनिषदो गावो दोग्धा गोपालनन्दनः। पार्थो वत्सः सुधीर्भोक्ता दुग्धं गीतामृतं महत्।’ उपनिषद गाय हैं, भगवान गोपालनंदन गाय दुहने वाले हैं, पार्थ-अर्जुन बछड़ा हैं, बुद्धिमान विद्वान उस दूध के पीने वाले हैं और गीता वह दूध है, जो जीवन का अमृत है।

जहां गाय हैं, वहीं भगवान श्रीकृष्ण का वास है...

गाय समस्त प्राणियों की माता हैं और शुभता की शरणस्थली हैं। भगवान श्रीकृष्ण का बाल्यजीवन गो-सेवा में बीता, इसीलिए उनका नाम ‘गोपाल’ पड़ा। तीनों लोकों के कष्ट हरने वाले श्रीकृष्ण के अनिष्ट हरण का काम गाय करती है। जब-जब श्रीकृष्ण पर कोई संकट आया, नंदबाबा और यशोदा माता पुष्पमाला से सजी गायों का दान करते थे। यह है गोमाता की महिमा और श्रीकृष्ण के जीवन में उनका महत्व। गाय हर प्रकार का सुख प्रदान करती हैं और इसी कारण वे सदा पूजनीय हैं। यह कहना है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गौसेवा गतिविधि के अखिल भारतीय संयोजक अजीत महापात्रा का।

जन्माष्टमी पर 'गौमाता' के दूध से करें 'गोपाल' का अभिषेक

स्वदेश से वार्ता में अजीत महापात्रा ने बताया कि उनका जन्म उड़ीसा में हुआ। बाल्यकाल में जन्माष्टमी पर माता-पिता के साथ पुरी में श्रीजगन्नाथ जी के दर्शन के लिए गए। वहां देखा कि गाय के दूध से भगवान का अभिषेक होता था। बाद में काशी दर्शन को गए। वहां देखा कि श्रीविश्वनाथ जी का चार आरतियों से पूर्व पुजारियों ने गाय के दूध से अभिषेक किया, लेकिन बाद में अन्य भक्तों ने बाजार के दूध से किया। क्या बाकी श्रद्धालु भी गाय के दूध से अपने आराध्य का अभिषेक कर रहे हैं? हमें अभिषेक करना है, पर दूध कौन-सा होना चाहिए, इसका विचार प्रत्येक हिंदू को करना होगा। मानसिकता बदलनी होगी।अजीत महापात्रा ने कहा कि ब्रज में श्रीकृष्ण जन्मभूमि है, बरसाना है, गोवर्धन है, वृंदावन है। क्या मंदिरों में शत-प्रतिशत गौ-दुग्ध से निर्मित सामग्री का भी प्रसादी-भोग लगे, ऐसा संकल्प ले सकते हैं? क्या हम यह भी संकल्प ले सकते हैं कि हम भगवान का प्रसाद और अभिषेक केवल गौमाता के अमृतमयी दूध और पंचगव्य से करेंगे? हम श्रीकृष्ण भक्त हैं। बिना गौसेवा किए क्या श्रीकृष्ण की भक्ति का अमृत हमें प्राप्त हो सकेगा? नहीं।

मंदिरों में गौमय उत्पादों को बढ़ावा दें, यही सच्ची राष्ट्रभक्ति है।

भगवान श्रीकृष्ण गोकुल में रहे। वहां नंदबाबा और मां यशोदा ने उन्हें गाय का दूध और मक्खन का भोग लगाया। श्रीकृष्ण भक्ति से पूर्व हमें नंदबाबा और यशोदा बनना पड़ेगा। संकल्प लेना पड़ेगा कि हम देवपूजन केवल गौ-आधारित पदार्थों से करेंगे। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन के उत्सव के दौरान भी हम गौ संरक्षण के महत्व को कैसे नजरअंदाज कर सकते हैं?

यदि हम वास्तव में भगवान कृष्ण से प्रेम करना चाहते हैं, तो हमें अपने हृदय से गाय से प्रेम करना चाहिए। जब तक हम गौ-रक्षा के संघर्ष में संलग्न नहीं होंगे, तब तक हम भगवान के निकट और प्रिय नहीं हो सकते। इस जन्माष्टमी पर हमें गौसेवी बनें, गौमय उत्पादों का प्रयोग करें, गौ-रक्षा के प्रति जागरूक बनें और युवाओं को प्रेरित करें। यही जन्माष्टमी का वास्तविक उत्सव होगा।

संत और श्रेष्ठ गौपालक हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

अजीत महापात्रा ने कहा कि सौभाग्य से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक संत हैं और श्रेष्ठ गौपालक व गौभक्त भी हैं। गोरखपुर स्थित जिस पीठ के वे महंत हैं, उसका नाम भी गोरक्षपीठ है। गोरक्षपीठ की गौशाला में स्थित गौमाता के पवित्र दूध से ही वहां सभी अनुष्ठान पूर्ण होते हैं और प्रत्येक अनुष्ठान को वैदिक मर्यादा के अनुसार योगी जी पूर्ण भी करते हैं।

एक संत के रूप में उनसे प्रार्थना है कि उप्र के सभी मठ-मंदिरों में भगवान के प्रसाद, अभिषेक व पूजन की विधि गौमाता के अमृतमयी दूध व गौमय उत्पादों से पूर्ण हो, ऐसी व्यवस्था वे अवश्य करें और इसका संदेश वे ब्रजभूमि से जन्माष्टमी पर दें। इससे सुंदर क्या बात होगी।मंदिरों में गौमय उत्पाद उपलब्ध हों, यह कार्य जगत कल्याण का कार्य है। अयोध्याजी, काशी और मथुरा, तीनों स्थानों पर पूजन-अभिषेक गोमय पदार्थों से हों, ऐसा निश्चय हो जाए, तो पूरे देश में एक संदेश जाएगा। यही हिंदुत्व है और यहीं से गौरक्षा के संकल्प का श्रीगणेश होगा।

जन्माष्टमी पर गौरक्षा संकल्प

अजीत महापात्रा ने कहा कि गोरक्षपीठ की परंपरा आज विश्वभर में व्याप्त है। विश्वभर में गोरक्षपीठ के अनुयायी हैं और योगी आदित्यनाथ उस परंपरा के मार्गदर्शक हैं। योगी आदित्यनाथ ने गो-रक्षा एवं गो-आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उत्कृष्ट कार्य किया है। देशभर के संत और मंदिरों के पुजारी स्वयं गौसेवी बनें और समाज को गौभक्त बनाएं, मंदिरों में गौमय उत्पादों को बढ़ावा दें, यही सच्ची राष्ट्रभक्ति है।

मधुकर चतुर्वेदी

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