ग्वालियर के साहित्य महोत्सव में मुरैना के वरिष्ठ साहित्यकार का सम्मान, ‘श्रीमद्भागवत महागीत’ का हुआ विमोचन; भक्ति, दर्शन और अध्यात्म का अनूठा संगम है कृति
ग्वालियर साहित्य साधना जब प्रसिद्धि की अपेक्षा के बजाय आत्मिक अनुभूति और सृजन के संकल्प से जुड़ जाती है, तो वह अपने आप में एक मिसाल बन जाती है। मुरैना के वरिष्ठ साहित्यकार और महाकवि सीताराम बघेल की साहित्यिक यात्रा भी कुछ ऐसी ही है। वर्ष 1974 से मौन साधक के रूप में निरंतर काव्य-सृजन कर रहे महाकवि बघेल को ग्वालियर में शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित साहित्य महोत्सव में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ‘घनानंद गीतिकाव्य अलंकरण-2026’ से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनकी महत्वपूर्ण कृति ‘श्रीमद्भागवत महागीत’ का विमोचन भी किया गया। सम्मान और कृति के लोकार्पण के साथ यह आयोजन साहित्य, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना के संगम का साक्षी बना।
ग्वालियर साहित्य संस्थान और लोकमंगल पत्रिका परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में साहित्य जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में महाकवि सीताराम बघेल की दीर्घकालीन साहित्य साधना और उनकी नवीन कृति के महत्व को रेखांकित किया गया। वर्ष 1974 से निरंतर काव्य-सृजन में संलग्न रहना उनकी साहित्य के प्रति प्रतिबद्धता और साधना का परिचायक है।

श्रीमद्भागवत के संदेशों को काव्य के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास
महाकवि सीताराम बघेल की कृति ‘श्रीमद्भागवत महागीत’ इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही। इस ग्रंथ के माध्यम से श्रीमद्भागवत में निहित आध्यात्मिक संदेशों, भक्ति भाव और दार्शनिक चिंतन को सरल एवं गेय काव्यात्मक अभिव्यक्ति के जरिए जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। इसकी विशेषता यह है कि इसमें आध्यात्मिक विषयों को ऐसी काव्यात्मक शैली में प्रस्तुत करने की पहल की गई है, जिससे पाठक इन संदेशों से सहजता से जुड़ सकें।कृति की समीक्षा करते हुए डॉ. राजरानी शर्मा ने इसे भक्ति, दर्शन और अध्यात्म का अद्भुत संगम बताया। उन्होंने ग्रंथ की विषयवस्तु और आध्यात्मिक भावभूमि के महत्व को रेखांकित किया। साहित्यिक दृष्टि से ऐसी कृतियां भारतीय सांस्कृतिक परंपरा और आध्यात्मिक चिंतन को काव्य के माध्यम से व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
साहित्यिक गरिमा के बीच सजा सम्मान समारोह

समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. भगवान स्वरूप चैतन्य ने की, जबकि क्षेत्रीय उपायुक्त (भू-अभिलेख) नीरज शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मंच पर डॉ. आशा वर्मा, प्रो. विष्णु अग्रवाल और विशिष्ट अतिथि डॉ. कल्पना शर्मा सहित साहित्य एवं समाज के अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सरिता दीक्षित ने किया। सेवानिवृत्त एडीएम शिवकुमार मिश्रा सहित अन्य अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई।कार्यक्रम के दौरान बालकुमार तिवारी ‘कुमारेश’ ने अतिथियों का स्वागत किया। साहित्यकारों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में महाकवि सीताराम बघेल को सम्मानित किया जाना उनकी साहित्यिक साधना के प्रति सम्मान का प्रतीक बना।
मौन साधना से निरंतर सृजन तक का सफर
महाकवि सीताराम बघेल की साहित्यिक यात्रा का सबसे उल्लेखनीय पक्ष उनका वर्ष 1974 से मौन साधक के रूप में निरंतर काव्य-सृजन करना है। उनकी यह साधना साहित्य को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संवेदना और आध्यात्मिक अनुभूति से जोड़ती है। ‘घनानंद गीतिकाव्य अलंकरण-2026’ से सम्मानित होना उनकी दीर्घकालीन साहित्यिक यात्रा को मिला महत्वपूर्ण सम्मान है।ग्वालियर में आयोजित यह साहित्य महोत्सव इस दृष्टि से भी उल्लेखनीय रहा कि यहां एक ओर वरिष्ठ साहित्यकार की दशकों की साधना को सम्मान मिला, तो दूसरी ओर ‘श्रीमद्भागवत महागीत’ के माध्यम से आध्यात्मिक साहित्य की नई प्रस्तुति पाठकों के सामने आई। यह आयोजन साहित्य और संस्कृति के संरक्षण तथा भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को काव्य के माध्यम से आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में याद किया जाएगा।