अमन शुक्ला, सतना: आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र मझगवां में कुपोषण की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। क्षेत्र के गांवों में कुपोषण के नित नए मामले सामने आ रहे हैं, वहीं जिम्मेदार विभागीय अमला बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बावजूद समस्या पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगा पा रहा है। ताजा मामला कानपुर गांव का है, जहां रामगोपाल का दो वर्षीय अभिराम मवासी गंभीर कुपोषण की स्थिति में पहुंच गया है।
बताया गया कि अभिराम को बीते 3 सितंबर को मझगवां स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया गया। वर्तमान में उसका वजन महज 5.6 किलोग्राम बताया जा रहा है। बच्चे की देखरेख कर रहे स्टाफ का दावा है कि एनआरसी में उपचार और पोषण आहार मिलने के बाद उसके वजन में कुछ सुधार हुआ है। हालांकि, चिकित्सकों के अनुसार मासूम अभी भी अत्यंत गंभीर कुपोषण की श्रेणी में है और उसका इलाज जारी है।
मां के छोड़कर चले जाने से बिगड़ी स्थिति
विभागीय जानकारी के मुताबिक अभिराम की मां उसे छोड़कर चली गई है। मां की अनुपस्थिति को बच्चे की देखभाल और पोषण में कमी का प्रमुख कारण बताया जा रहा है। इससे पहले भी अभिराम को अप्रैल 2026 में एनआरसी में भर्ती कराया गया था। उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ था, लेकिन घर लौटने के बाद दोबारा उसकी स्थिति बिगड़ गई।बीएमओ डॉ. रूपेश सोनी ने बताया कि बच्चा अत्यंत गंभीर कुपोषण की श्रेणी में है। उसका वजन 5.6 किलोग्राम है और वह एसएएम की स्थिति में है। फिलहाल एनआरसी में उसका उपचार किया जा रहा है।
सुरांगी की घटना के बाद भी चुनौती बरकरार
बता दें कि इससे पहले मझगवां क्षेत्र के सुरांगी गांव में जुड़वां भाई-बहन कुपोषित मिले थे। उपचार के दौरान सतना के पीआईसीयू वार्ड में सुप्रियाशी की मौत हो गई थी। घटना के बाद विभाग ने क्षेत्र में सर्वे कराकर कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराया था। इसके बावजूद अभिराम का मामला यह सवाल खड़ा करता है कि सर्वे, उपचार और पुनर्वास के बाद बच्चों की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी हो रही है।