माणिक चंद्र वाजपेयी 'मामाजी' की 107वीं जयंती पर विशेष व्याख्यान आयोजित
भोपाल:वरिष्ठ पत्रकार एवं स्वदेश के यशस्वी संपादक माणिक चंद्र वाजपेयी 'मामाजी' की 107वीं जयंती के अवसर पर सोमवार को विश्व संवाद केंद्र, मध्यप्रदेश की ओर से विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। 'राष्ट्रहित और पत्रकारिता' विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता, समाजसेवी एवं अर्चना प्रकाशन के उपाध्यक्ष माधव सिंह दांगी ने कहा कि मामाजी का जीवन केवल पत्रकारिता ही नहीं, बल्कि समाज जीवन के हर क्षेत्र में अनुकरणीय रहा। उनकी पत्रकारिता में राष्ट्रहित सर्वोपरि था और आज की पत्रकारिता को उनके सिद्धांतों एवं पत्रकारीय संहिता की सबसे अधिक आवश्यकता है।
दांगी ने कहा कि पत्रकार की दृष्टि का प्रभाव उसके समाचार के माध्यम से समाज पर पड़ता है। इसलिए समाचार लिखते समय पत्रकार को यह विचार करना चाहिए कि उसका समाज और राष्ट्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा। मामाजी का मानना था कि समाचार निष्पक्ष होना चाहिए। पत्रकार की व्यक्तिगत विचारधारा समाचार पर हावी नहीं होनी चाहिए। यदि पत्रकार को अपने विचार व्यक्त करने हैं तो वह लेख या विश्लेषण के माध्यम से उन्हें सामने रख सकता है।
मनीषा परंपरा के प्रतिनिधि थे मामाजी
दांगी ने मामाजी के व्यक्तित्व को 'सादा जीवन, उच्च विचार' का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि वे छोटे से छोटे कार्य को भी पूरी निष्ठा और कौशल से करते थे। युवा पत्रकारों और लेखकों को मार्गदर्शन देना भी उनके जीवन का महत्वपूर्ण पक्ष रहा। दांगी ने कहा कि मामाजी भारत की मनीषा परंपरा के प्रतिनिधि थे और उनकी चेतना राष्ट्र के परम वैभव की भावना से जुड़ी थी।
पत्रकारिता में बनाए श्रेष्ठ मानक: लाजपत आहूजा
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्व संवाद केंद्र न्यास के अध्यक्ष एवं पूर्व जनसंपर्क संचालक लाजपत आहूजा ने कहा कि मामाजी ने पत्रकारिता की औपचारिक शिक्षा या डिग्री नहीं ली थी, फिर भी उन्होंने अपने कार्य से ऐसे मानक स्थापित किए, जिन्हें आज भी आदर्श माना जाता है। उन्होंने एक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि एक कांग्रेस नेता से जुड़े आपत्तिजनक फोटो और समाचार को मामाजी ने प्रकाशित करने से रोक दिया था। उनका कहना था कि अखबार परिवारों तक पहुंचता है, इसलिए समाचार के सामाजिक प्रभाव का भी ध्यान रखना चाहिए।
विशेषांक का किया विमोचन
आहूजा ने बताया कि आपातकाल के दौरान मामाजी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों और पुस्तकों के माध्यम से मध्यभारत में संघ कार्य के इतिहास को सुरक्षित किया। उनकी प्रमुख कृतियों में 'आपातकाल का संघर्ष', 'मध्यभारत की संघगाथा' और 'ज्योति जला निज प्राण की' शामिल हैं। उन्होंने बताया कि एक समय इंदौर प्रेस क्लब के चुनाव में मामाजी का नाम अध्यक्ष पद के लिए सामने आया तो अभय छजलानी ने उनके सम्मान में अपना उम्मीदवार वापस ले लिया था।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य भारत प्रांत संघचालक अशोक पांडेय की उपस्थिति में संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर तैयार विशेषांक 'मध्यभारत में संघ विकास की यात्रा' का विमोचन किया गया। विशेषांक में मध्यभारत में संघ कार्य के विकास और उसकी यात्रा से संबंधित सामग्री शामिल की गई है। इसका संपादन डॉ. लोकेन्द्र सिंह ने किया है। कार्यक्रम का संचालन पत्रकारिता की विद्यार्थी आराधना मौर्य ने किया, जबकि आभार डॉ. लोकेन्द्र सिंह ने व्यक्त किया।