भोपाल। जबलपुर हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश की सडक़ों पर हुए गड्ढों को लेकर एक जनहित याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस दिया है। बता दें कि यह जनहित याचिका इंदौर निवासी सेवानिवृत्त ट्रेन मैनेजर राजेन्द्र सिंह ने हाईकोर्ट में राज्य की सडक़ों पर हुए गड्ढों को लेकर पीआईएल दायर की, जिस पर सुनवाई हुई।
प्रदेश की सडक़ों पर गड्ढे और बढ़ते हादसों पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है और केंद्र और राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस दौरान कोर्ट में सवाल उठा कि जब न्यूक्लियर पावर प्लांट और समुद्र के नीचे मेट्रो बन सकती है तो टिकाऊ सडक़ें क्यों नहीं बन सकीं? अब अगली सुनवाई में सडक़ गुणवत्ता, गड्ढों से होने वाले हादसों और एजेंसियों की जवाबदेही पर अहम बहस होगी।
पांच अगस्त तक जवाब देने को कहा
कार्यकारी चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच उक्त जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं। इस दौरान दोनों पक्षों ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था। अब कोर्ट ने उन्हें पांच अगस्त तक जवाब दाखिल करने को कहा है। हाईकोर्ट ने इससे पहले 10 नवंबर 2025 को भी नोटिस जारी किया था।
याचिकाकर्ता ने उठाए सवाल
याचिकाकर्ता राजेन्द्र सिंह ने दायर पीआईएल में कोर्ट में सवाल किया कि जब न्यूक्लियर पावर प्लांट और समुद्र के नीचे मेट्रो बन सकती है तो टिकाऊ सडक़ें क्यों नहीं? उन्होंने आरोप लगाया कि सडक़ों के खराब रखरखाव और प्रशासनिक लापरवाही से हादसे बढ़ रहे हैं। याचिका में सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की 2023 रिपोर्ट का हवाला भी दिया। इसमें बताया कि 2020 से 2023 के बीच सडक़ दुर्घटनाओं में मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया। राजेंद्र ने दावा किया कि वर्ष 2023 में गड्ढों से जुड़े हादसों में 31.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। याचिका में कहा गया कि गड्ढों की वजह से 5,840 हादसे हुए। इन्हीं वजह से 2161 मौतें हुईं।