पांढुर्णा। मध्य प्रदेश के पांढुर्णा में शुक्रवार को पारंपरिक गोटमार मेला शुरू होते ही जाम नदी का किनारा पत्थरबाजी का मैदान बन गया। झंडे पर कब्जे की परंपरा को लेकर पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष आमने-सामने आ गए। पत्थरबाजी शुरू होने के महज 15 मिनट में 28 लोग घायल हो गए।हालात को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा और मेडिकल इंतजाम किए थे। मेला क्षेत्र में 7 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र, 22 एंबुलेंस और 44 डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है। घायल लोगों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर अस्पताल भेजा जा रहा है।
झंडे के लिए आमने-सामने आते हैं दोनों पक्ष

गोटमार मेले में हर साल की तरह इस बार भी पांढुर्णा और सावरगांव के लोग जाम नदी के बीच लगाए जाने वाले झंडे पर कब्जे के लिए एक-दूसरे पर पत्थर फेंकते हैं।शुक्रवार को मेला शुरू होते ही दोनों तरफ से पत्थरबाजी शुरू हो गई। देखते ही देखते नदी का पूरा क्षेत्र इस पार और उस पार से हो रही पत्थरबाजी की चपेट में आ गया। शुरुआती 15 मिनट में ही 28 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई।
700 पुलिसकर्मी, ड्रोन और CCTV से निगरानी
मेले के दौरान किसी बड़े हादसे को रोकने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था काफी बढ़ाई है। करीब 700 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।मेला क्षेत्र और आसपास के इलाकों पर नजर रखने के लिए 10 CCTV कैमरे और 3 ड्रोन लगाए गए हैं। पुलिस और प्रशासन की टीमें भीड़ की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं।
मेडिकल टीम भी मौके पर तैयार
पत्थरबाजी में चोट लगने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मेला क्षेत्र में 7 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाए हैं। 44 डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है और 22 एंबुलेंस मौके पर मौजूद हैं।घायलों को पहले मेले में ही प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है। जिन लोगों को ज्यादा इलाज की जरूरत है, उन्हें अस्पताल भेजा जा रहा है।
पुरानी परंपरा, लेकिन जानलेवा भी रही है
गोटमार मेला पांढुर्णा की सदियों पुरानी परंपरा से जुड़ा है, लेकिन पत्थरबाजी के कारण इसमें गंभीर घटनाएं भी होती रही हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 1955 से 2025 के बीच गोटमार के दौरान पत्थरबाजी में 13 लोगों की मौत हो चुकी है।यही वजह है कि हर साल मेले के दौरान सुरक्षा और मेडिकल इंतजामों पर खास जोर दिया जाता है। इस बार भी प्रशासन की चुनौती परंपरा के बीच भीड़ को नियंत्रित रखने और किसी बड़े हादसे को रोकने की है।