हापुड़। प्रजनन स्वास्थ्य पर जानकारी की कमी और समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए पिलखुवा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक खास कार्यक्रम हुआ। सरस्वती कॉलेज ऑफ नर्सिंग, हापुड़ ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षित गर्भपात दिवस और विश्व गर्भनिरोधक दिवस के मौके पर यह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें सुरक्षित गर्भपात, गर्भनिरोध, अनियोजित गर्भधारण की रोकथाम और गर्भपात के बाद जरूरी देखभाल पर खुलकर बात हुई।
कार्यक्रम की शुरुआत और आयोजन
कार्यक्रम का आयोजन कॉलेज के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने किया। प्राचार्य प्रो. (डॉ.) आर. पिरामिला के मार्गदर्शन और सरस्वती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के महाप्रबंधक एन. वर्धराजन के सहयोग से यह संभव हुआ। पीएचसी प्रभारी डॉ. अंकिता भारद्वाज और डॉ. प्रियंका दुबे मौजूद रहीं। विभागाध्यक्ष और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नसीमा खातून के स्वागत भाषण से कार्यक्रम शुरू हुआ।

नाटक के जरिए रखी गई आम महिलाओं की मुश्किलें
बीएससी नर्सिंग सातवें सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने नाटक प्रस्तुत किया। इसमें दिखाया गया कि प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में महिलाओं को किन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और समाज की कौन सी भ्रांतियां रास्ता रोकती हैं। नाटक में युवतियों, विवाहित महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और प्रसव के बाद की माताओं के लिए सही जानकारी और समय पर इलाज की अहमियत बताई गई।
मिथक और तथ्य सत्र, प्रश्नोत्तरी और शपथ
नाटक के अलावा गर्भनिरोध और सुरक्षित गर्भपात पर स्वास्थ्य वार्ता हुई। मिथक और तथ्य का सत्र चला, प्रश्नोत्तरी हुई और सभी ने जागरूकता की शपथ ली। प्रतिभागियों को भरोसेमंद जानकारी के आधार पर फैसला लेने और जरूरत पड़ने पर योग्य स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लेने के लिए प्रेरित किया गया।
प्राचार्य ने गोपनीयता और सम्मान पर दिया जोर
प्रो. (डॉ.) आर. पिरामिला ने कहा कि गर्भनिरोधक के विकल्पों की सही जानकारी, अनचाहे गर्भ की रोकथाम और समय पर सुरक्षित व कानूनी स्वास्थ्य सेवाएं बेहद जरूरी हैं। उन्होंने प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं में गोपनीयता, सम्मान के साथ संवाद और प्रमाणित जानकारी पर जोर दिया। उनके मुताबिक समय पर जागरूकता ही सुरक्षित मातृत्व की नींव है।
कुल 56 लोगों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम में कुल 56 लोग शामिल हुए। इनमें चार संकाय सदस्य, दो चिकित्सक और बीएससी नर्सिंग सातवें सेमेस्टर के 20 विद्यार्थी थे। इनके साथ 30 गर्भवती महिलाएं, प्रसव के बाद की माताएं और युवा विवाहित महिलाएं भी आईं। अंत में सहायक प्रोफेसर नेहा काकरान ने सबका आभार जताया। कार्यक्रम को सफल बनाने में ओबीजी विभाग, चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों ने सहयोग किया।